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अटल जी की कविताओं में राष्ट्र और संवेदना का अद्भुत समन्वय: कुलपति

ByNeeraj sahu

Dec 25, 2025

अटल जी की कविताओं में राष्ट्र और संवेदना का अद्भुत समन्वय: कुलपति

अटल जी की स्मृति में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ द्वारा साहित्यिक प्रतियोगिता

भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन की पूर्व संध्या पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा निबंध लेखन एवं एकल काव्यपाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अटल जी के राष्ट्रवादी विचारों, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा उनकी काव्य-संवेदनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराना रहा। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय तथा विभिन्न महाविद्यालयों से लगभग 80 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा अटल जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन सार्वजनिक जीवन में शुचिता, संवाद और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने अटल जी की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदना और आशावाद स्पष्ट रूप से झलकता है, जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्य अतिथि महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अंकुर सक्सेना ने अटल जी को एक ऐसे नेता के रूप में स्मरण किया, जिन्होंने राजनीति और साहित्य को समान गरिमा प्रदान की। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का संदर्भ देते हुए कहा कि उनकी काव्य-रचनाएं भारतीय समाज की पीड़ा, संघर्ष और आशा का सशक्त प्रतिबिंब हैं तथा साहित्य और राजनीति के बीच सेतु का कार्य करती हैं।

विशिष्ट अतिथि ज्ञानेंद्र कुमार, कुलसचिव, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था—वे कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ संवेदनशील कवि भी थे। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि अटल जी की कविताओं और विचारों को पढ़कर जीवन में सकारात्मक मूल्यों को आत्मसात करें। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रोफेसर मुन्ना तिवारी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में वैचारिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करते हैं।

इसके पश्चात पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ एवं केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा वर्ष भर होने वाले आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिक्षकों, शोधार्थियों एवं कर्मचारियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ प्रेमलता, डॉ शैलेंद्र तिवारी, डॉ पुनीत श्रीवास्तव, डॉ पूजा निरंजन, डॉ सुधा दीक्षित, डॉ आशीष दीक्षित, आशुतोष शर्मा, रिचा सेंगर, कपिल शर्मा, डॉ रेनू शर्मा, डॉ गरिमा, जोगेंद्र सिंह, डॉ. द्युति मालिनी, आकांक्षा सिंह, शाश्वत सिंह, मंजरी श्रीवास्तव, मनीष मंडल एवं विशाल यादव शामिल रहे।

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