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बुंदेलखंड चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में सिसक रहा हैं

ByNeeraj sahu

Mar 10, 2026
बुंदेलखंड चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में सिसक रहा हैं। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सभी मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों में रिक्त पद व आवश्यक उपकरण यथा शीघ्र उपलब्ध करवाए जाएं।
महोदय,
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा द्वारा मेडिकल कॉलेज एवं जिला चिकित्सालयों में रिक्तियां वा धड़ल्ले से चल रहे अवैध नर्सिंग होम्स की मांगो को पूरा न होते देख उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री की उनके झांसी आगमन पर विरोध करने का योजना बनाई थी पर नवाबाद थाना अध्यक्ष  ने मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय, प्रवक्ता रघुराज शर्मा एवं एडवोकेट प्रदीप झा को दोपहर को ही गिरफ्तार कर लिया।
              मोर्चा की मांग हैं की अति पिछड़ा व बदहाल बुंदेलखंड के लोगों के पास इलाज के लिए पैसा नहीं होता हैं इसलिए बुंदेली लोग सरकारी चिकित्सालयों पर निर्भर होकर अपनी बीमारी का इलाज करवाने को बाध्य रहते हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। बुंदेलखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालांे, सी.एच.सीयों व पी.एच.सीयों  में न तो पर्याप्त चिकित्सक, मेडिकल, पैरामेडिकल स्टाफ हैं और न चिकित्सीय उपकरण। इस कारण जो थोड़े  सामर्थ्यवान लोग हैं वो लखनऊ या दिल्ली जाकर अपना इलाज करवा लेते हैं और जो समर्थ्यवान नहीं होते हैं उनकी जीवन लीला इलाज के अभाव में समाप्त हो जाती है।
झांसी मेडिकल कॉलेज में
प्रथम वर्ग, चिकित्सक, द्वितीय एवं (मेडिकल कॉलेज), तृतीय वर्ग (अस्पताल), चतुर्थ वर्ग एवं आउटसोर्स के कुल सृजित पद मात्र 40प्रतिशत से कम भरे हैं बाकी सब रिक्तियाँ हैं। आखिर हम बुन्देलियों को किस गुनाह की सजा दी जा रही है कि जो हमें चिकित्सीय अभाव में बिन मौत मारा जा रहा है।
         इसी प्रकार झांसी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध नर्सिंग होम जो सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों क्रमशः मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सचिव झांसी विकास प्राधिकरण, अग्नि शमन अधिकारी, नियोजन अधिकारी, औषधि अधिकारी आदि की मिलीभगत से चलते हैं, उन्हें प्रशासन रोकने का कार्य नहीं कर पा रहा है। आपसे निवेदन है कि उपरोक्त अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करने की कृपा करेंगे।
        एक तरफ सरकार कहती हैं कि उत्तर प्रदेश में सब चंगा हैं और बुंदेलखंड में विकास की गंगा हैं। बुंदेलखंड का असली चेहरा सामने हैं, यहां चिकित्सा के लाले पड़ रहे हैं फिर भी सरकार हास्यास्पद बातें बोल रही है।
      चूकिं प्रदेश सरकार सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस को रोक पाने में असक्षम है इसलिए सरकारी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस से रोक हटा कर जो प्राइवेट प्रैक्टिस अलाउंस बचेगा उससे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए नए चिकित्सकों की भर्ती हो सकेगी।
      महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मात्र एक एम.आर.आई, एक सी.टी, दो अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। मेडिकल कॉलेज में 20 करोड़ से ज्यादा के चिकित्सीय उपकरणों की आवश्यकता हैं परन्तु सरकार 3-4 करोड़ ही दे रही है। क्या इससे यहां अच्छी चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध हो सकती है।
        जब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज की इतनी दयनीय स्थिति है तो सोचिए बांदा और उरई के मेडिकल कॉलेजों की स्थिति क्या होगी।
          समस्त आउटसोर्स कर्मचारियों को चिकित्सीय क्षेत्र में नियमित किया जाये जिससे आउटसोर्स के कर्मी भी मन लगाकर कार्य कर सकेंगे।
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