ग्रामीण एडिटर धीरेन्द्र रायकवार
समथर (झांसी):-खाद-बीज पानी की समस्या से जूझ रहे किसान कर्ज लेकर जो फसलें बोते हैं उन्हें आवारा जानवर तबाह कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में छुट्टा जानवर किसानों के दुश्मन बने है तो शहर सीमा के गांवों में आवारा घूमने वाले दुधारू पशु।आवारा पशुओं के झुंड रातोंरात हरी भरी फसल चौपट कर देते हैं। आवारा जानवरों से तबाह किसान लगातार प्रशासन से फसलों की सुरक्षा के लिए गुहार लगाते आ रहे हैं पर प्रशासन इसका कोई स्थाई समाधान नहीं निकाल सका।
समथर क्षेत्र के नब्बे प्रतिशत गांवों में छुट्टा जानवरों का आतंक लंबे समय से कायम है। ग्राम लोहागढ के मानवेंद्र सिंह( सुकटे) ने बताया कि रात में एक साथ पचास साठ आवारा जानवरों का झुंड निकलता है वह जिस तरफ से भी गुजरता है फसलों को बर्बाद करता निकलता है।
पूरी रात करतें हैं रखवाली
अपनी फसलों को बचाने के लिए किसान रात भर जगकर खेतों की रखवाली करते हैं।इसके बावजूद जरा सी चूक होने पर सारी फसल आवारा पशु नष्ट कर देते हैं।इन पशुओं के आतंक से अधिकतर किसानों का खेती से मोह भंग हो रहा है। समथर क्षेत्र के सजोखरी-बडोखरी ,बुडेरा ,साकिन, करही,लोहागढ छेवटा ,मडोरा कला ,ऐरा ,पहाडपुरा ,बागरी के किसानों के अनुसार जहाँ
एक तरफ आवारा पशु किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए है वहीं दूसरी तरफ नीलगायों का झुंड खेतों में खड़ी फसल को तबाह कर रहा है। दुधारू पशुओं के दूध निकालने के बाद पशु पालक बछड़ों संग उनको आवारा छोड़ देते हैं। शायद ही ऐसा कोई गांव हो जहां चार से पांच अवारा बछड़े न टहलते दिखाई पड़े। समस्या की असली वजह तो यह है कि आवारा किस्म के ये पशु जिन खेतों में अड्डा जमाते हैं वहां से फसल की तबाही के बाद ही हटते हैं।
फसल नष्ट होते देख अन्न दाता परेशान
अपनी फसल को नष्ट कर रहे छुट्टा जानवरो को देखकर समथर कसबा व क्षेत्र के अन्नदाता परेशान है। ग्राम करही के किसानों दिग्विजय सिंह ,ढडकोले महाराज , पूर्व प्रधान राम सिंह के मुताबिक छुट्टा जानवर फसल को चरकर नष्ट कर रहे है।गांव के मार्गों से लेकर मुख्य मार्ग तक छुट्टा जानवरों का आतंक है।जो किसी को कहीं भी घायल कर देते है।
समथर मे सड़कें बनी तबेला
चौपड़ बाजार, मेवाती चौराहा , नई बस्ती , कटरा मोहल्ला, अगा बाजार ,पीपरी चौराहा , रोड,पीपरी रोड थाना के पास हर तरफ छुट्टा जानवरों की बहुतायत है। छुट्टा जानवर सड़क के स्पीड ब्रेकर बने हुए है चाहे जितना हार्न बजाये ये टस से मस नहीं होते। छुट्टा जानवरों के लिए सड़के तबेला बनी हुई है।
रिपोर्ट यशपाल सिंह