तपती धरती पिघलता जीवन सूखे बुंदेलखंड में पानी की भीषण समस्या इसके जिम्मेदार हम खुद
दिन प्रतिदिन गिरते जलस्तर के कारण पानी एक भीषण समस्या बन गया हमने खुद इस समस्या को खड़ा किया है ब प्रकृति से छेड़छाड़ की है अगर हम ऐसा न करते तो आज पानी की कोई कमी न होती जिसके परिणाम हमें आज भुगतने पड़ रहे हैं और आने वाले दौर में इसके और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे कभी बुंदेलखंड में छोटी बड़ी बहुत सी नदियां थी लेकिन आज के इस आधुनिक दौर में बहुत सी नदियों ने अपना अस्तित्व खो दिया है वहीं कुछ बची हुई नदियां आज भी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं कभी बुंदेलखंड में प्रचुर मात्रा में पानी पाया जाता था आज वही बुंदेलखंड पानी के लिए तरस रहा है इसके जिम्मेदार हम स्वयं हैं क्योंकि हमने ही नदियों पर बांध बना लिए जिससे नदियों का पानी रुक गया व कई नदियां सूख गई जंगलों को काट दिया है पहाड़ों को तोड़ दिया पेड़ों की कटान आज भी जारी है अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाला समय बहुत ही भयंकर होगा न पानी होगा न पेड़ पौधे होंगे आज पानी की समस्या ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया की बुंदेलखंड में कई जिलों और गांव में पानी की बहुत भीषण समस्या बनी हुई है अगर यह समस्या ऐसी ही बनी रही तो आने वाले समय में क्या होगा कई पशु पक्षी आज भी पानी की वजह से भूख और प्यास से मर रहे हैं नदी और तालाब सूख चुके हैं जिनमें कहीं-कहीं पर तो नदियों और तालाबों में पानी की एक बूंद भी नहीं बची जिससे इंसानों और पशु पक्षियों को पानी की भीषण समस्या से सामना करना पड़ रहा हे अगर आने वाले समय में इस समस्या का कोई कारागार उपाय नहीं किएे गएे तो पानी की यह समस्या हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिएे एक बहुत भीषण समस्या बन कर सामने आएगी