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बाराबंकी की आर्द्रभूमियों के अवैध निर्माण पर एनजीटी सख्त, निर्माण रोकने के निर्देश ।

ByNeeraj sahu

Dec 16, 2025

बाराबंकी की आर्द्रभूमियों के अवैध निर्माण पर एनजीटी सख्त, निर्माण रोकने के निर्देश ।

महोदय,

नई दिल्ली/बाराबंकी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में स्थित कई वेटलैंड्स (आर्द्रभूमियों) में हो रहे अवैध अतिक्रमण और कंक्रीट निर्माण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट आदेश दिया है कि संबंधित जल निकायों में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न होने दिया जाए।  यह आदेश मूल आवेदन संख्या 249/2025 में पारित किया गया, जो झांसी के पर्यावरण कार्यकर्ता एड. बी.एल. भास्कर, नरेंद्र कुशवाहा आदि द्वारा दायर किया गया था। आवेदन में आरोप लगाया गया कि बाराबंकी जिले के सरायबरई, सराही, भगहर, नटकौली, चकौरा, भितरी, बनगांवा, खुर्दमऊ, बैनाटीकहार, सलारपुर, कमरावां और सादुल्लापुर आदि कुल 12 की वेटलैंड्स में स्थायी कंक्रीट निर्माण कर जल निकायों को नष्ट किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान आवेदक ने न्यायाधिकरण के समक्ष फोटोग्राफ प्रस्तुत करते हुए बताया कि जल निकायों में निर्माण कार्य अभी भी जारी है। इस पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी की पीठ, जिसकी अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे तथा डॉ. ए. सेंथिल वेल विशेषज्ञ सदस्य के रूप में उपस्थित थे, ने प्रतिवादी विभागों को तत्काल प्रभाव से अवैध निर्माण रोकने के निर्देश दिए।

न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश प्रदेश भर की वेटलैंड्स के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस आदेश का सख्ती से पालन किया गया तो जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और जैव विविधता को बड़ा लाभ मिल सकता है।

बाराबंकी जिले की वेटलैंड्स (आर्द्रभूमियों) में हो रहे अवैध अतिक्रमण और कंक्रीट निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल निकायों में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

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