गरौठा l झांसी l महंगाई के इस दौर में गरीबों की जेब पढ़ रही है ढीली फिर कैसे पूर्ण होगा सर्व शिक्षा अभियान का सपना साकार
ग्रामीण एडिटर धीरेंद्र रायकवार
प्राइवेट स्कूलों के हर वर्ष बदलते कोर्स के कारण परेशान हैं अभिभावक प्राइवेट स्कूलों द्वारा बताई गई दुकान से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही है कॉपी किताबें जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि प्राइवेट स्कूल संचालक हर वर्ष किताबों का कोर्स बदल देते हैं जिससे वही पुरानी किताबें पांच रूपये से लेकर दस रूपये में रद्दी के भाव मैं बेचनी पड़ रही है और वही नया कोर्स पांच हजार से लेकर सात हजार रूपये तक मे आने लगा है जिसके कारण गरीब बच्चों के अभिभावकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई कराना गरीबों के लिए एक जटिल समस्या बन गई है सरकार भले ही प्राइवेट स्कूलों के बच्चों पर थोपे जाने वाले खर्चों पर नियंत्रण करने की बात कहती है लेकिन प्राइवेट स्कूलों की यूनिफार्म आैर बुक सेलर से सांठगांठ करके अभिभावकों पर किताबों का बोझ भारी पड़ रहा है प्राइवेट स्कूल संचालक मनमानी करते हुए हर वर्ष कोर्स बदल देते हैं जिससे अभिभावकों को बच्चों के लिए फिर से नया कोर्स खरीदना पड़ता है और वही पुराना कोर्स रद्दी के भाव में बेचना पड़ रहा है फिर स्कूल संचालक एक नया फरमान जारी कर देते हैं कि आपको इसी दुकान से किताबें और यूनिफार्म खरीदनी है जिससे आम जनता को काफी परेशान होना पड़ता है वहीं राज्य सरकार और केंद्र सरकार सर्व शिक्षा अभियान चला रही है लेकिन गरीब के बच्चे आखिर कैसे कैसे पढ़ेंगे शिक्षा मंत्री और जिला शिक्षाअधिकारी का ध्यान इस ओर कराना जरूरी है क्योंकि किताबों की महंगाई को देखते हुए गरीबों के हित में कुछ ना कुछ तो करना ही होगा तभी सर्व शिक्षा अभियान पूर्ण माना जाएगा जिससे गरीब के बच्चों को सस्ती और सुलभ पढ़ाई मिल i
रिपोर्ट मुबीन खान गरौठा
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