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झांसी में AHA 2025 गाइडलाइन्स पर आधारित तीन दिवसीय BLS–ACLS प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ 

ByNeeraj sahu

Jan 21, 2026
झांसी में AHA 2025 गाइडलाइन्स पर आधारित तीन दिवसीय BLS–ACLS प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
 ** डॉ0 शिव कुमार प्राचार्य महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज एवं प्रोफ़ेसर अंशुल जैन डाइरेक्टर पैरामेडिकल ने किया शुभारंभ
 ** प्रशिक्षण कार्यक्रम में 36 प्रतिभागियों ले रहे भाग, मेडिकल कालेज के रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग कालेज की फैकल्टी तथा पैरामेडिकल स्टाफ रहे शामिल
    एमएलबी मेडिकल कॉलेज एवं एमएलबी पैरामेडिकल कॉलेज, झांसी द्वारा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) से मान्यता प्राप्त बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एवं एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS) प्रोवाइडर कोर्स का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2025 में जारी नवीनतम AHA 2025 गाइडलाइन्स पर आधारित था।
     कार्यक्रम का उद्घाटन  डॉ0 शिव कुमार, प्राचार्य, एमएलबी मेडिकल कॉलेज, एव प्रो0 अंशुल जैन डायरेक्टर पैरामेडिकल झाँसी  द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ0 शिव कुमार ने कहा कि
“आने वाले समय में चिकित्सा शिक्षा में ट्रेनिंग एवं रिसर्च पर विशेष फोकस रहेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके।”
     इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग कॉलेज की फैकल्टी तथा पैरामेडिकल स्टाफ शामिल थे। प्रशिक्षण सत्र का संचालन एसजीपीजीआई, लखनऊ से आए वरिष्ठ विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिसमें प्रो0 संदीप साहू एवं श्री रामनरेश यादव प्रमुख रूप से शामिल रहे। इनके साथ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के प्रमाणित प्रशिक्षकों की टीम ने सैद्धांतिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रदान किया।
     इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो0 अंशुल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि
“अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की गाइडलाइन्स को पुनर्जीवन (Resuscitation) का गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। अक्टूबर 2025 में जारी नई AHA गाइडलाइन्स में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन नवीन दिशानिर्देशों में प्रि-अरेस्ट कंडीशन्स की पहचान एवं रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे कार्डियक अरेस्ट की स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही हस्तक्षेप संभव हो सके।
साथ ही, NMC द्वारा भी इस प्रकार के प्रशिक्षण को अनिवार्य किया गया है, एवं AHA यह स्पष्ट रूप से अनुशंसा करता है कि सभी हेल्थकेयर वर्कर्स—चाहे वे डॉक्टर हों, नर्स हों या पैरामेडिकल स्टाफ—के लिए एक समान मॉड्यूल के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाए।”
     कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं व्यवहारिक बताया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के अद्यतन और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
     इस अवसर पर डॉ0 संदीप साहू (एसजीपीजीआई, लखनऊ) ने बताया कि नई AHA 2025 गाइडलाइन्स में केवल कार्डियक अरेस्ट के दौरान ही नहीं, बल्कि पोस्ट-रिससिटेशन केयर पर भी विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणामों के लिए BLS को ACLS के साथ जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। डॉ0 साहू के अनुसार, पोस्ट-रिससिटेशन केयर में अब तापमान प्रबंधन (Targeted Temperature Management) तथा ECMO की भूमिका उभरकर सामने आ रही है,जिससे न्यूरोलॉजिकल आउटकम में सुधार संभव हो पा रहा है।
    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “इन सभी उन्नत तकनीकों का मूल आधार उच्च गुणवत्ता की चेस्ट कंप्रेशन, सबसे शीघ्र AED का उपयोग तथा समुचित इन-हॉस्पिटल केयर ही है। यही पुनर्जीवन की पूरी श्रृंखला (Chain of Survival) का हृदय है।
     कार्यक्रम के समापन पर डॉ0 अदिति ने कहा कि BLS एवं ACLS प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी, व्यावहारिक तथा सीखने के दृष्टिकोण से समृद्ध रहा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान सभी अवधारणाओं को सरल, चरणबद्ध एवं हैंड्स-ऑन तरीके से समझाया गया, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में सही और समय पर निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ा।
     उन्होंने यह भी कहा कि नवीनतम AHA गाइडलाइन्स पर आधारित यह प्रशिक्षण डॉक्टरों, नर्सों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार के कार्यक्रम मरीजों की जीवन-रक्षा में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। डॉ. अदिति ने आयोजन समिति एवं प्रशिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
     इसी क्रम में डॉ0 अंजलि ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह BLS एवं ACLS कोर्स अत्यंत सुव्यवस्थित, व्यावहारिक एवं वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप था। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नवीनतम AHA गाइडलाइन्स को स्पष्ट एवं सरल तरीके से समझाया गया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिलेगी।
     उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के हैंड्स-ऑन आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और आपातकालीन परिस्थितियों में रोगी परिणामों (patient outcomes) को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
     इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। एमएलबी मेडिकल कॉलेज की AHA इंस्ट्रक्टर टीम ने भी सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें डॉ0 नूतन अग्रवाल, डॉ0 चावी सेठी(एनेस्थीसियोलॉजी) तथा डॉ0 जाकी सिद्दीकी (मेडिसिन), डॉ0 संदीप साहू, डॉ0 जितेंद्र कुमार, डॉ0 रामबाबू, डॉ0 पल्लवी अग्रवाल  शामिल रहे।
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