कथा सत्संग “समाज सेवा का सर्वश्रेष्ठ साधन -आचार्य पं कमलाकांत अरजरिया ————-
समथर नगर के मुहल्ला हरीपुरी में विश्वेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही शिव महापुराण कथा में अन्तर्राष्ट्रीय भागवताचार्य पं कमलाकांत अरजरिया ने शिव महापुराण कथा के आठवें दिन श्री गणेश कार्तिकेय जन्म व तारकासुर वध तथा भगवान शिव के नंदी हनुमत सहित विविध शिव अवतारों की कथा सुनाई, उन्होंने कथा सत्संग की महिमा गान करते हुए कहा कि पदम पुराण में कहा गया है “नैता दृशा परो धर्मा:यत्कथा श्रवणं हरे”अर्थात कथा श्रवण से ईश्वर व धर्म के प्रति श्रद्धा भक्ति और कर्म निष्ठा की जागृति होती है इसीलिए विष्णु पुराण में कहा गया है कि “संगम:खलु साधुनाम् उभयेषां च सम्पदा”सत्संग कथा से साधु जन दुष्ट जन दोनों वर्ग को जीवन जीने की प्रकाश सम्पदा प्राप्त होती है श्रीमद्भागवत कथा में शुकदेव जी ने कहा कि भागवत कथा गंगा के दर्शन आचमन स्नान तीनों की तरह श्रोता वक्ता और कथा के आयोजक को पवित्र व सरस मृदुल वना देती है अतैव यह सिद्ध तत्व है कि “कथा सत्संग से श्रेष्ठ संसार में समाज सेवा का अन्य कोई दूसरा साधन नहीं है” परन्तु सत्संग कथा इस युग में बडे ही विचारणीय परिस्थितियों में आ गया है श्रोता वक्ता आयोजकों को सत्संग की पवित्रता वनाए रखना चाहिए,इस युग में श्रोता आयोजकों की अपेक्षाएं कथा वाचकों से कुछ ज्यादा ही हो गई है वो गायन,मनोरंजन, हास्य मनोविनोद, और स्वयं की स्तुति गान भी भगवत्कथा में चाहते हैं और कई आयोजकों की इच्छा होती है कि स्त्री कथा वक्ता उन्हें कथा सुनाएं, इसके पीछे आयोजक की क्या मंशा हो सकती है कहना कठिन है पर यह कथा परम्परा कभी नहीं रही, और कथाकार यह सब अपेक्षाएं पूर्ति करते करते पवित्र नही रह पाते अथवा जिस पुराण की वह कथा कहने हेतु न्युक्त किए जाते उस ग्रंथ का उचित सम्मान नहीं हो पाता है,जब तक कथा सत्संग उचित पात्रों में रहा तब तक कथा सत्संग जीवन वृत्तिका मात्र थी पर कुछ अनधिकृत लालची लोगों के प्रवेश ने कथा सत्संग की, कथावाचकों की वहुत गरिमा घटाई है , अतैव सभी सनातनी वर्ग से निवेदन करुगा कि समाज सेवा के सर्वश्रेष्ठ साधन की गरिमा को न गिराएं,,धन सम्पदा कमाने हेतु अनेक साधन है,, आगे श्री आचार्य श्री ने कहा कि श्री गणेश के रुप में श्री कृष्ण जी ने गौलोक से आ कर जन्म लिया, माता पिता के परम भक्त है, इसीलिए वह देवताओं में प्रथम पूज्य वने, गणपति का अर्थ होता है “गणानां पति इति गणपति -गण के दो अर्थ है देवता और राष्ट्र अर्थात जो देवों का अधिपति हो वह गणेश,राष्ट्र में किसी भी काम की शुरुआत में जिसका पूजन होता हो वह गणेश, गणेश जी का स्वरुप अत्यंत रहस्यमयी है एक दंत होने का मतलब है जो कहेंगे वही एक दांत एक वात, यदि कान देखे तो सूप जैसे है जिसका अर्थ है दुनिया में आलोचक वहुत होते समालोचक कम इसलिए ज्यादा सुनो फिर वुनो और स्वविवेक से जितना ठीक लगे उतना ग्रहण करो शेष फटक कर वाहर करो, गणेश जी की आंख आकार में बडी ही छोटी होने का कारण है परदोष कम देखो आत्म चिंतन ज्यादा करें,नाक लम्बी होने का अर्थ है कि सदैव ऐसा आचरण रखो कि नाक लम्बी ही रहे कट न पाए,औरों की अंदर से वाहर जाती है पर गणेश जी की जीभ वाहर से अन्दर जाती है अतैव जीभ अन्दर रखोगे तो झगडे नहीं होंगे,पेट बडा होने अर्थ है कि सुनने को वहुत मिलेगा पेट में रखना सीखों, जिनके पास यह गुण है वही सिद्धि बुद्धि का स्वामी वन सकता है विश्व रुप प्रजापति की दो बेटियों का विवाह श्री गणेश जी के साथ सम्पन्न हुआ शुभ और लाभ दो वेटे हुए, गणेश जी मानो उपदेश कर रहे हैं कि मेरे स्वरुप वाली विशिष्टतायें आपके पास है तो सिद्धि बुद्धि संगिनी और शुभ और लाभ जीवन में आते रहेंगे, इसीलिए वेद गाते हैं त्वमेव केवल कर्तासि त्वमेव केवल धर्तासि, कुमार कार्तिकेय के वारे में कहा कि इनके स्मरण मात्र से व्रम्हचर्य पालन में सहायता मिलती है व्रम्हचर्य नाम इसलिए पडा कि व्रम्ह कभी अपनी स्थिति से च्युत नहीं होता विद्यार्थियों को खास तौर पर जानना चाहिए,,कि व्रम्हचर्य का अर्थ है शुक्र संवर्धन, जिससे जीवन उच्च गति स्थान पर जाता है ,और शुक्र का पतन पतनोन्मुखी है, कुमार कार्तिकेय ने शुक्र संवर्धन की ताकत से तारकासुर जैसे महान पराक्रमी दैत्य का वध करने में सफल रहे,अंत में उन्होंने कहा कि शिव पुराण में उच्च मानदंडों का जीवन जीने के अनेक सूत्र है, पुराण पाठ वेद पाठ हेतु पं रमाकांत कौशिक, पं आनंद द्विवेदी, पं मोहित चतुर्वेदी,पं राम किशुन द्विवेदी, पं पंकज पटैरिया, पं रामनरेश सूरौठिया , आदि विप्र गण रहे हारमोनियम बांसुरी पर राजा भइया गौतम,तबले पर सौरभ गोस्वामी,पैड राहुल लोधी (पिछोर)कलाकारों ने संगत दी कथा की आरती श्रीमती प्रियंका मुकेश चंचौदिया ने की,इस अवसर पर पं विनोद,पं उमाशंकर,पं रमाकांत,पं पंकज अनिल , जीतेन्द्र कद्दू महाराज युवराज अमित कलश मिश्रा प्रिंस ,सक्षम पार्थ सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया