जिला कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा किसान भाईयों एवं जनपद के समस्त कीटनाशक विक्रेता बंधुओं को शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में निर्देशित किया गया है कि आप सभी एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (IPM) विधि का अधिक से अधिक प्रयोग करें। कृषि विभाग के कृषि रक्षा अनुभाग द्वारा अवगत कराया गया है कि वनस्पति संरक्षण सलाहकार, भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, वनस्पति संरक्षक, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (हरियाणा) द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा FSSAI की अधिसूचित प्रयोगशालाओं से प्राप्त कृषि/खाद्य उत्पादों के अवशेष कीटनाशी अवशेष स्तर (MRL) से अधिक पाये गये हैं। साथ ही फसलों/खाद्य उत्पादों पर मानक के विपरीत प्रतिबंधित एवं ऑफ-लेबल कीटनाशको का उपयोग पाया गया है। जिस हेतु जनपद में ‘कीटनाशकों के विवेकहीन/अंधाधुध प्रयोग से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव तथा कृषि उत्पाद फाइटो सेनिटरी मानक के अनुरुप न होने के कारण उनके निर्यात पर विपरीत प्रभाव’ के सम्बंध में आपको निर्देशित किया जाता है कि फसलवार एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कृषि पारिस्थितिक तंत्र विश्लेशण (AESA), रसायनों के संस्तुत, सुरक्षित एवं न्यायोचित प्रयोग इत्यादि बिंदुओं को ध्यान में रखकर फसलोत्पादन करें।
कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि उपर्युक्त निर्देशों का व्यापक स्तर पर कृषकों में प्रचार-प्रसार करें। किसान भाई एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन विधि के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन जुताई करें, बीज शोधन/भूमि शोधन करें। लाइट ट्रेप/फेरोमोन ट्रेप,, बर्ड परचर, ट्रेप फसल एवं कम जहरीले रसायन का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। कीट/रोग प्रतिरोधी प्रजातियों की बुवाई करें। जैविक कीटनाशकों जैसे- नीम ऑयल, व्यूबेरिया वैसियाना, ट्राइकोडर्मा, एन0पी0वी0 इत्यादि का प्रयोग करें। मित्र कीटों का संरक्षण करें।
किसान भाइयों एवं कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि ग्लाइकोसेट रसायन का उपयोग एवं विक्रय प्रतिबंधित है। अतः इसका विक्रय कदापि न करें। अतः दिये गये निर्देशों एवं सुझावों को अपनाकर रसायनों के घातक परिणामों से बचना जरुरी है।
211122जनपद के समस्त कीटनाशक विक्रेता बंधुओं को शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में निर्देशित किया गया