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*उ.प्र.उद्योग व्यापार मण्डल ने नायब तहसीलदार को दिया ज्ञापन, जीएसटी की बढ़ाई गई दरों को वापिस लेने की कही बात*

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Jul 14, 2022

*उ.प्र.उद्योग व्यापार मण्डल ने नायब तहसीलदार को दिया ज्ञापन, जीएसटी की बढ़ाई गई दरों को वापिस लेने की कही बात*

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल द्वारा एक ज्ञापन प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित नायब तहसीलदार कोंच को दिया। जिसमें जीएसटी की बढ़ाई गई दरों व अनाज, गुड़ आदि में 5 प्रतिशत प्रस्तावित जीएसटी वापिस लेने की मांग की।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल के नगर अध्यक्ष संजय लोहिया के नेतृत्व में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार कोंच जितेन्द्र पटेल को देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल निरंतर मांग करता आया है कि ब्रांडेड जो खाद वस्तुएं है उनको भी जीएसटी निल श्रेणी में लाया जाना चाहिए। व्यापार मंडल ने कभी राष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के ब्रांड की वकालत नहीं की परंतु छोटे छोटे व्यापारी छोटे-छोटे उद्योग अपने गांव कस्बे में अपनी वस्तुओं पर ब्रांड लगाकर कार्य करते हैं, उनको जीएसटी की निल श्रेणी में लाने के लिए निवेदन करते हैं। ज्ञापन में कहा गया प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा था कि आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगाई जाएगी। जीएसटी काउंसिल ने एफएसएसआई एक्ट का हवाला देकर यानी लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के अनुसार सभी खाद्य वस्तुएं पैकिंग होकर और प्रॉपर लेवल लग कर ही बिकेंगे, चाहे वह मंडी बिकने वाला गेहूं, धान, दलहन, तिलहन, गुड़ व मसाले एवं कोई भी सामान हो। तिलहन एवं मसाले पहली ही जीएसटी की 5% के दायरे में आए हुए हैं तथा चावल का चावल एक और लेवल लगकर बिकेगा। इसी तरह आटा, मिल का आटा, दाल मिल की दाल पैक एवं लेवल लगाकर बिकेगा और उन पर जीएसटी 18 जुलाई से लगा दिया जाएगा। मंडी में किसान अपनी जिंस लेकर आता है और ढेरकर अपनी कृषि जिंस को भेजता है। व्यापारी इसको बैग में भरता है और इस पर लेबल लगाकर प्रदर्शित करता है कि इसमें कौन सी क्वालिटी की जिनसे तो यह पैक भी हो गया और इस पर लेबल भी लग गया। जीएसटी काउंसिल की 28-29 जून की बैठक मैं अनुशंसा के अनुसार 18 जुलाई से जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे। कोरोना की मार से यह मध्यमवर्गीय उद्योग, मध्यमवर्ग, व्यापारी, निम्न वर्गीय उद्योग जो गांव, कस्वे, शहर में संचालित हैं, अपने आधारभूत पूंजी हो चुके हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड चलाने के लिए हर खाद्य वस्तु को ब्रांडेड की श्रेणी में लेने बस जीएसटी के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल के सदस्य पर निरंतर दबाव डालते रहते हैं। 80 करोड लोगों को भारत सरकार खाद्यय वस्तुएं उपलब्ध कराकर उनकी समस्या दूर करती है परंतु भारत का 55 करोड मध्यमवर्गीय उपभोक्ता जिसमें छोटे छोटे ट्रेड उद्योग भी शामिल है स्वरोजगार के माध्यम से ही अपनी सोच में आय के स्त्रोतों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की व्यवस्था करता है। खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लगाना इनके हितों पर कुठाराघात होगा। आज भारत में ऑनलाइन व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, ऑनलाइन कंपनियां उपभोक्ता को डिस्काउंट का लालच देती हैं। व्यापारी अपना व्यापार होता जा रहा है, लाखों व्यापारी बेरोजगार हो चुके हैं। ज्ञापन में बताया गया की ऐसी स्थिति में गेहूं, आटा, दाल, चावल आदि आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगने दें, जिस हेतु 28-29 जून की 47वीं जीएसटी काउंसलिंग की मीटिंग में भारत सरकार को आवश्यक वस्तुओं पर पैकेजिंग एवं लिविंग के नाम पर लगाए जाने वाले कर जीएसटी की अनुशंसा को नष्ट करवाया जाए। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में संजय लोहिया अध्यक्ष, रामजी गुप्ता देवगांव वाले, महामंत्री विकार अहमद, चेयरमैन मुकेश सोनी, उपाध्यक्ष राजू यादव, अजय गोयल, नवनीत गुप्ता, मिथिलेश गुप्ता, महेश शंकर लोहिया, आनंद गुप्ता, राम मनोहर राठौर, वीरेंद्र अग्रवाल, राजू पटवा, अरविंद अग्रवाल, छोटे, पंचम पटेल, सतीश राठौर, विजय गुप्ता, गोले, नरेश लोहिया, सीताराम, विनोद लोना, बसंत अग्रवाल नगर अध्यक्ष आदि प्रमुख थे।

रविकांत द्विवेदी,जालौन-यूपी

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