मौर्य-कौर को मिला फेस्टिवल में वेब सीरीज में एक्टिंग का ऑफर
कोंच इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की सार्थकता और सकारात्मकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता फेस्टिवल में सेशन के दौरान विभिन्न सीरियलों में अभिनय कर चुके बृजेश मौर्य एवं सिमरन कौर को वेबसीरीज में अभिनय का ऑफर मिला। बता दें कि कोंच इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में अभिनेता बृजेश मौर्य एवं अभिनेत्री सिमरन कौर का लाइव सेशन चल रहा था इसी समय निर्माता राजेश झा ने कमेंट के माध्यम से एम एक्स प्लेयर की उनकी अगली वेब सीरीज में अभिनय का ऑफर दिया जिसे दोनों लाइव सेशन के दौरान ही स्वीकार किया। बता दें कि कोंच इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल प्रतिभाओं के लिए संजीवनी साबित हो रहा है ।
*जिंदा दफन करा दो, अब आदमी कंहा है?*
द्वितीय कोंच इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के प्रथम दिन महाराष्ट्र प्रान्त के कवियों ने अपनी रचनाओं का वर्चुअल पाठ कर दशकों को आनंदित किया। कवि सम्मेलन में रचना पाठ करते हुए कवि देवेंद्र चौधरी तिरोडा ने कहा कि इन्सान के दिलों में, दिखती नमी कहा है? जिंदा दफन करा दो, अब आदमी कहा है? कवियत्री वीना आडवानी ‘तन्वी” ने रचना पाठ करते हुए पढ़ा कि मैं माटी हूं जिस रुप मे ढ़ालो ढ़ल जाती। सम्मान करो बस तुम मेरा मैं यही तो चाहती। साहित्यकार संजय जैन मुंबई ने पढ़ा कि सुबह हो या शाम हो दिन हो या रात हो। आओ मिलकर के मेहनत करे। इक नया इतिहास रचे। जिंदगी को नया लक्ष्य दे।। फ़िल्म अभिनेता एवं वरिष्ठ साहित्यकार सुनील दत्त मिश्रा ने पढ़ा आपस में क्या बात हुईं मंदारो की. चिड़िया चहकी भूलीं बात चिनारो की। कोंच इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में कवि सम्मेलनों के प्रभारी का दायित्व निर्वाहन करने वाले कवि/साहित्यकार भास्कर सिंह माणिक ने पढ़ा लोहा कुंदन बन जाता पारस की संगत में।सारा जग रंग जाता, प्रेम सुधा की रंगत में। अध्यक्षता कर रहे कवि चंद्र प्रकाश गुप्त “चन्द्र” ने पढ़ा कि वो कायर आवाज सुनो, हम भारत मां के सेवक हैं। धूल चटाते हैं दुश्मन को,हम लंबी रेस के धावक।। आभार व्यक्त कोंच फ़िल्म फेस्टिवल के संयोजक/संस्थापक पारसमणि अग्रवाल ने किया।