अपने आसपास के परिवेश की समस्या को लेकर नाटक करें रंगकर्मी – बृजेश मौर्य
कोंच (जालौन) भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) इकाई- कोंच की निःशुल्क ग्रीष्मकालीन बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य कार्यशाला के दसवें दिन टीवी एवं फ़िल्म अभिनेता गिरीश थापर ने कहा कि न सीखने की उम्र होती न सिखाने की उम्र होती। जब भी जंहा से जो सीखने को मिले, हमें सीखना चाहिए क्योंकि कोई भी व्यक्ति कभी भी पूर्ण नहीं होता। कार्यशाला का शुभारंभ सहसचिव ट्विंकल राठौर ने इप्टा गीत “बजा नगाड़ा शांति का” से किया। फ़िल्म रेस 3, हाउस फुल 4, पोस्टर बॉय, शकुंतला देवी, एक पहेली लीला, सुपर नानी, भारत भाग्य विधाता, रेस्क्यू, तू बाल ब्रमचारी मैं कन्या कुमारी, बंटी और बबली, शमशेरा, शेम,रेड, कर्मा कैफे, डी एन ए में गांधी जी, इश्क ने क्रेजी किया आदि ने अभिनय करने वाले अभिनेता गिरीश थापर ने कहा कि जिस प्रकार पतझड़ हुए बिना पेड़ पर नए पत्ते नहीं आते, ठीक उसी तरह परेशानी और कठिनाई सहे बिना, इंसान के भी अच्छे दिन नहीं आते। अच्छा कलाकार बनने के लिए अच्छा इंसान बनना जरूरी होता। क्राइम पेट्रोल, मेरी हानिकारक बीबी, अम्मा के बाबू की बेबी, मेरे साईं आदि सीरियल में अभिनय करने वाले अभिनेता बृजेश मौर्य ने कहा कि अच्छे जीवन का आंकलन न ही अंग्रेजी बोलने से, न ही अच्छे कपड़े पहनने से और न ही ठाट-बाट वाली जीवन शैली से होता है, बल्कि अच्छे जीवन का आंकलन तो यह है कि, कितने लोगों के चेहरे खिलते हैं, जब वो आपका नाम सुनते हैं। इसलिए किसी भी काम को छोटा नहीं समझे कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता, आप तो बस काम करते जाओ सही दिशा व दशा आपको सफलता की दहलीज पर पहुंचाएगा। बड़ोदा से अभिनय की पढ़ाई कर रहे श्रेयश गुप्ता (राम) ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुश्किल वो चीज होती हैं जो हमें तब दिखती है, जब हमारा ध्यान लक्ष्य पर नहीं होता। संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता हैं फिर चाहे वो कितना भी कमजोर क्यों न हो प्रांतीय सचिव/इप्टा कोंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मुहम्मद नईम ने कहा कि अभिनय कही ढूढ़ना नहीं पड़ता , वह हमारे अंदर ही छुपा होता, ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियाँ हमारे ही भीतर है, वो तो हम ही है जो उस शक्तियों को अँधेरा समझकर हाथ आँखों पर रखकर रोने लगते है। इप्टा कोंच के सरंक्षक अनिल कुमार वैद ने कहा कि सफलता पाने के लिए आपके अंदर जुनून होना चाहिए। यदि वो जुनून आपके अंदर है तो ये मेरा वादा है कि आपके सामने “काश” शब्द नहीं आने देंगे। आर्थिक, मानसिक, शारीरिक मुझसे जो मदद होगी मैं करूँगा। उन्होंने कहा कि जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। इप्टा कार्यशाला में तकनीकि दायित्वों का निर्वाहन इप्टा सचिव पारसमणि अग्रवाल ने किया। आभार रंगकर्मी साहना खान ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कोंच, उरई, झांसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, महोबा, छतरपुर, दतिया आदि स्थानों से रंगकर्मियों ने कार्यशाला में प्रतिभाग किया।