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*कोतवाली पुलिस के कारनामे से वकील गुस्से में, बारसंघ अध्यक्ष के खिलाफ निरोधात्मक कार्यवाही:-रिपोर्ट-रविकांत द्विवेदी, जालौन*

*कोतवाली पुलिस के कारनामे से वकील गुस्से में, बारसंघ अध्यक्ष के खिलाफ निरोधात्मक कार्यवाही:-रिपोर्ट-रविकांत द्विवेदी, जालौन*

कोंच कोतवाली पुलिस का एक ऐसा कारनामा सामने आया है। जिसके कारण वकीलों में जबर्दस्त गुस्सा है और वकील पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलनेे की तैयारी में हैं। दरसल पंचायत चुनाव के मद्देनजर पुलिस निरोधात्मक कार्यवाही में लगी है।उनमें बारसंघ अध्यक्ष संजीव तिवारी का नाम भी है। इसके अलावा पुलिस में कई ऐसे बुजुर्गों के नाम सम्मलित किये हैं जिनका पंचायत चुनाव से दूर दूर तक लेना देना नहीं है क्योंकि वह कोंच नगर के निवासी हैं। वहीं पुलिस ने अपनी चालानी रिपोर्ट में दिखाया है कि भ्रमण के दौरान उसने देखा कि ये लोग धन बल से भदेवरा गांव में चुनाव प्रभावित कर रहे थेे। हम आपको बताते चलें कि पंचायत चुनाव को लेेकर पुलिस और प्रशासन किसी भी तरह अपना कोटा पूरा करने मेें तैयार हैं और एक जगह बैठकर ऐसे लोगों के खिलाफ चालानी रिपोर्ट बना डाली जिन्हें पंचायत चुनाव से किसी भी तरह का वास्ता नहीं है और वे कोंच के रहने बालेे है।।अधिवक्ता के अलावा अन्य सीनियर सिटीजंस भी है। कोंच कोतवाली के दरोगा चेतराम बुंदेला ने एसडीएम कोर्ट में जो चालानी रिपोर्ट भेजी हैै उसमें बताया गया है कि जब वह भ्रमण पर निकले तो उक्त लोग भदेवरा गांव में धन बल का प्रयोग करते पाए गए। जिसको लेकर नगर व अधिवक्ताओं में खूब चर्चा हो रही है और लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैम। वकीलों में भी बहुत गुस्सा है। इस रिपोर्ट में बारसंघ अध्यक्ष संजीव तिवारी समेत तीन सीनियर अधिवक्ता ओमप्रकाश कौशिक, सरनामसिंह यादव के साथ नगर के प्रमुख व्यवसायियों हाजी सेठ नसरुल्ला, हाजी मोहम्मद अहमद, थोक सब्जी विक्रेता हाजी आफाक अहमद, रिटायर्ड पालिका कर्मी प्रभुदयाल गौतम, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेन्द्रसिंह यादव शामिल हैं। इनमें अधिकांश लोगों की उम्र साठ से पैंसठ बर्ष के बीच हैै। इस प्रकरण को लेकर बारसंघ अध्यक्ष ने पूरी स्थिति से एसडीएम अशोक कुमार को अवगत करा दिया है। जिस पर एसडीएम ने फिलहालआश्वासन दिया है कि वह इस रिपोर्ट को पुलिस से वापिस लेनेे के लिए कहेंगेे। फिलहाल इन प्रकरण की हर जगह चर्चा हो रही है। वहीं वकील भी यह कहते देखे जा रहे है कि जब उनके अध्यक्ष का ही फर्जी तरीके से नाम आ रहा है तो आम पब्लिक व अन्य अधिवक्ताओं का क्या होगा।

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