*पानी परात को हाथ छुआ नहीं नैनन के जल सो पग धोए श्रीमद् भागवत कथा मैं सुदामा चरित्र का हुआ वर्णन रिपोर्ट दया शंकर साहू नरेंद्र सविता*
ग्रामीण एडिटर कृष्ण कुमार
झांसी के कस्बा पूछ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम ग्यारह में चल रहे सप्ताह ज्ञान यज्ञ श्रीमद् भागवत कथा मैं आज सुदामा एवं भगवान श्री कृष्ण की मित्रता का वृतांत कथावाचक साध्वी राधिका शास्त्री द्वारा उपस्थित भक्तों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ कथा वाचक ने बताया कि अपने बालसखा सुदामा के आगमन पर उनके पैरों को धोने के लिए परात में पानी मंगवाया परन्तु सुदामा की दुर्दशा देखकर उनको इतना कष्ट हुआ कि आँसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए। सुदामा की पत्नी ने भगवान के लिए भेंट स्वरूप चावल भिजवाए थे संकोच बस सुदामा श्रीकृष्ण फिर नहीं दे पा रहे थे परंतु श्री कृष्ण सुदामा पर दोषारोपण करते हुए से चोरी कहते हैं जिसमें तुम पहले से ही माहिर हो जिसके पीछे का दृष्टांत बताने के साथ ही बताया कि मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए भगवान श्री कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को दो मुट्ठी चावल खाते ही धन एवं धान्य से परिपूर्ण कर दिया कृष्ण सुदामा की कथा को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु अश्रुपूरित हो गए कथा के दौरान कथा पारीक्षत आरती नंन्दराम सहित भगवान सिंह, विनोद, मुकेश, स्वरूप सिंह, सुनील, राघवेन्द्र, नरोत्तम, दिलीप, रामू, मानवेन्द्र धर्मेन्द्र, अरविंद जीतू, बबलू, दीपक, राहुल, दीपेन्द्र, उदय रामलखन, पवन, अमन, अंकित, सिद्धार्थ, आदि मौजूद रहे।