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राष्ट्रीय कवि मैथिलीशरण की पुण्यतिथि पर याद कर परिवार के लोगों ने दी श्रद्धांजलि।रिपोर्ट-इदरीश बाबा

राष्ट्रीय कवि मैथिलीशरण की पुण्यतिथि पर याद कर परिवार के लोगों ने दी श्रद्धांजलि।रिपोर्ट-इदरीश बाबा

 

पर्वतों की ढलान पर हल्का हरा और गहरा हरा रंग, एक-दूसरे से मिले बिना फैले पड़े हैं।
यह कविता और किसी की नहीं उनकी है जिनकी आज जयंती है । तहसील मोठ क्षेत्र के कस्बा चिरगांव में जन्मे 3 अगस्त 1886 में सेठ रामचरण दास कनकने के पुत्र राष्ट्रीय कवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपने साहित्य में लिखी थी ।जो देश ही नहीं विदेशों तक खूब पड़ी गई। आपको बता दें कि यह कविता पढ़के ऐसे लगता है कि हमारे मन की बात को किसी ने शब्द दे दिए। ठीक इसी प्रकार अगर हम ऊपर उठकर देखें, तो दुनिया में अच्छाई और बुराई अलग-अलग दिखाई देगी। भ्रष्टाचार के भयानक विस्तार में भी नैतिकता स्पष्ट अलग दिखाई देगी। आवश्यकता है कि नैतिकता एवं राष्ट्रीयता की धवलता अपना प्रभाव उत्पन्न करे और उसे कोई दूषित न कर पाए। इस आवाज को उठाने और राष्ट्रजीवन की चेतना को मंत्र-स्वर देने वाले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय कवि थे। उन्होंने आम-जन के बीच प्रचलित देशी भाषा को मांजकर जनता के मन की बात, जनता के लिए, जनता की भाषा में कही, इसलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें राष्ट्रकवि का सम्मान देते हुए कहा था ।मैं तो मैथिलीशरणजी को इसलिए बड़ा मानता हूं कि वे हम लोगों के कवि हैं और राष्ट्रभर की आवश्यकता को समझकर लिखने की कोशिश करते है। इनके रचनाओं में देशभक्ति, बंधुत्व भावना, राष्ट्रीयता, गांधीवाद, मानवता तथा नारी के प्रति करुणा और सहानुभूति के स्वर मुखर हुए। इनके काव्य का मुख्य स्वर राष्ट्र-प्रेम, आजादी एवं भारतीयता है। वे भारतीय संस्कृति के गायक थे। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के मार्गदर्शन में जिन कवियों ने ब्रज-भाषा के स्थान पर खड़ी बोली हिन्दी को अपनी काव्य-भाषा बनाकर उसकी क्षमता से विश्व को परिचित कराया, उनमें गुप्तजी का नाम सबसे प्रमुख था। उनकी काव्य-प्रतिभा का सम्मान करते हुए साहित्य-जगत उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में याद करता रहा है। याद में आज पूरे देश में गुप्त जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई। जहां तहसील मोंठ क्षेत्र में जन्मे राष्ट्रकवि कि परिजनों से जब सर्कल ऐप की टीम ने बात की तो उनकी बातें सुन आंखों में आंसू झलक उठे।राष्ट्रकवि गुप्त जी की कई बार मुलाकात राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से हुई थी ।जिनके साथ गई पुत्रवधू ने सर्कल ऐप की टीम से बात की और उन्हें ताजा किया ।वह यह याद अपने दिल में छुपाए बैठी थी। वहीं दूसरी ओर उनके नाती सौरभ गुप्ता से भी बात की जिसमें उन्होंने दद्दा को नमन करते हुए कहां की मुझे वह सौभाग्य नहीं मिला कि मैं अपने दादा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण के दर्शन कर सकूं । उनकी जीवन लीला समाप्त होने के बाद में पैदा हुआ तथा प्रतिवर्ष दद्दा की जयंती तथा उनकी पुण्य तिथि पर झांसी में रहने के बावजूद भी चिरगांव उनकी जन्मभूमि पर आकर धूमधाम के साथ जयंती तथा पूण्यतिथि मनाता हूं ।दद्दा की जयंती पर पुष्प लेकर उनकी समाधि तथा स्टेचू पर पूरा कस्बा पुष्प अर्पित करने पहुंचा और वही घर पर भी राष्ट्र कवि के द्वारा लिखित पुस्तकें ,प्रतिभा तथा सम्मानित की गई प्रतिभाओं के छात्र-छात्राओं तथा लोगों ने अवलोकन किया।

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