मंडलायुक्त एवं जिला अधिकारी के आदेश को आबकारी विभाग का ठेंगा—
इन दिनों मंडलायुक्त एवं जिला अधिकारी के आदेशों को आबकारी विभाग ठेंगा दिखाने का काम कर रहा है, आबकारी विभाग के संरक्षण में पूरे जिले में शराब ठेकेदारों द्वारा अवैध शराब बेचने का कार्य किया जा रहा है, एक ऐसा ही मामला झांसी जिले में देखने को मिला है, जिसमें विभिन्न तहसीलों के क्षेत्र में ओवर रेटिंग शराब बेचने का मामला सामने आया है।
क्या थे मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी के आदेश—
एक और जिला के जिलाधिकारी और मंडलायुकत के द्वारा चेतावनी दी जाती है कि अवैध शराब व ओवर रेटिंग पर भी मंडलायुक्त ने नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने ओवररेटिंग को रोकने के लिए व छापामार कार्यवाही करने के लिए कहा था। साथ ही दुकानों में रेट लिस्ट चस्पा करने के लिए निर्देश दिये कि प्रिंट रेट से ज्यादा रेट में देसी शराब जो कोई ठेकेदार बेचेगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी, स्पष्ट कहा देशी शराब की बेचने की लिस्ट चस्पा की जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
झांसी जिले के ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के हैं मामले—-
ऐसा ही मामला समथर थाना क्षेत्र के ग्राम धींगपुरा देसी शराब के ठेकाओ का है, जहां पर प्रिंट रेट से ज्यादा रेटों में सफेद देशी शराब के क्वॉर्टर बेचने का काम किया जा रहा है, ग्राहकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है, अधिकारियों के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
यह है पूरा मामला——
समथर थाना क्षेत्र के साकिन लोहागढ़ धीगपुरा का है। जहां पर देसी शराब के ठेके पर ओवर रेटिंग और रेट लिस्ट न चस्पा करने का मामला सामने आया है, बताया जा रहा है इन देशी शराब के ठेकेदारों के द्वारा ठेका पर न ही देशी शराब के क्वार्टर बेचने की लिस्ट चस्पा है, जहां पर देसी शराब का एक क्वार्टर 60 रूपये का मिलता है, और देशी शराब के कवार्टर निर्धारित मूल्य 45 लिखा है, वही सफेद देसी शराब का ₹60 में बेचने का काम किया जा रहा है।
क्या बोले शराब के शौकीन—–
शराब पीने वालों शौकीनो( ग्राहकों)के द्वारा बताया जा रहा है सभी ग्रामो के देसी शराब के ठेका मालिकों के द्वारा ओवर रेट मैं देशी शराब को बेचने का काम करवाया जा रहा है, जिसकी शिकायत कई बार जिला के आबकारी विभाग के अधिकारियों से की गई लेकिन अधिकारियों के द्वारा आज तक कोई कारवाई नही की गयी है और न ही ओवर रेटिंग का मामला संज्ञान में लिया गया है।
क्या बड़ा सवाल हुआ पैदा—–
वहीं इस पूरे मामले पर एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि जब इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित विभाग को की जा रही है, उसके बावजूद भी अगर विभाग द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है और मामले की पूर्ण जानकारी होने के बावजूद भी संवंधित विभाग शांत है तो कहीं न कहीं इस बात से हम नहीं मुकर सकते कि यह पूरा ओवर रेटिंग शराब बेचने का खेल आबकारी विभाग के संरक्षण में खेला जा रहा है, शराब के शौकीनों की जेबों पर डाका डालने का काम किया जा रहा है, इससे शासन बदनाम हो रहा है और प्रशासन मालामाल हो रहा है।
क्या बोला ओवर रेट में शराब बेचने पर सेल्समैन——
शराब पीने वाले शौकीनों( ग्राहकों )के द्वारा प्रिंट.से ज्यादा रेट में देसी शराब के क्वार्टर बेचने के इस विषय में सेल्समैन से बात की गई तो सेल्समैन के द्वारा बताया गया है कि ठेकेदार के द्वारा बताया गया की सफेद देसी शराब का एक क्वार्टर ₹60 में बेचने का काम किया जाना है, जैसा आदेश दिया गया है, उसी प्रकार से हम देशी शराब की दुकानों पर शराब बेचने का काम कर रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार—–
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि ओवर प्रिंट का खेल आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से किया जा रहा है, इसीलिए देसी शराब के ठेका पर कार्यवाही नहीं की जा रही है, कुछ दिन पूर्व में समथर थाना क्षेत्र के ग्राम लोहागढ मैं अवैध शराब पकड़ी गई थी, जिसमें मध्य प्रदेश के देसी शराब के क्वार्टर पकड़े गए थे, जहां पर सेल्समैन को पकड़ लिया गया था, आबकारी विभाग के अधिकारी व इलाहाबाद के अधिकारी के द्वारा लेकिन पकड़े हुए सेल्समैन को कुछ समय बाद छोड़ दिया गया और मामला शांत कर दिया था, जो लोग अवैध शराब और ओवर रेट का खेल खेल रहे हैं, उन्हें छोड़ दिया गया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि जो लोग अवैध शराब और ओवर रेटिंग का काम कर रहे हैं, इन सभी दबंग ठेकेदारो व अवैध शराब माफिया से आबकारी विभाग में सेटिंग है, जैसे ही ग्रामीण इलाकों में कोई भी छापामार कार्यवाही की जाती है, तो पहले ही देशी शराब के ठेकेदारों और शराब माफियाओं को फोन से सूचना करके सावधान कर दिया जाता है, और आबकारी विभाग के द्वारा औपचारिकता कर कार्यवाही की जाती है, आबकारी विभाग के लोग ही यह सब खेल में शामिल है।
सवाल बना है कब बंद होगा मिली भगत का खेल—-
यह सवाल बना है कि अवैध शराब और ओवर रेट में देसी शराब का खेल कब बंद होगा और कब शराब माफिया और ओवर रेट मैं शराब बेचने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी, अब देखना होगा कि ऐसे ठेकेदारों और अबकारी विभाग के नुमाइन्दो के द्वारा जो जिला के उच्चाधिकारियों के आदेश की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और शराब के पीने वाले ग्राहको की ओवर रेटिंग करके जेब पर डाका डालने का काम किया जा रहा है, अब देखना होगा कि जिला के उच्चाधिकारियों और आबकारी विभाग के अधिकारी के द्वारा क्या कोई कार्यवाही की जाती है या फिर दबंग देसी शराब के ठेकेदारो के द्वारा इसी प्रकार ओवर रेटिंग करके देसी शराब बेचने का काम किया जाएगा, क्या जिला के उच्च अधिकारी इन ओवर प्रिंट वाले ठेकेदारों के सामने बोने नजर आएंगे।
तहसील टहरौली मैं शराब के ठेकों पर ओवर रेटिंग मैं बेची जा रही है शराब, टहरौली क्षेत्र के शराब के ठेकों पर अक्सर अधिक दामों में शराब की बिक्री की जाती है, जब आज टहरौली के शराब के शौकीन लोगों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि देसी शराब का क्वार्टर₹45 की जगह ₹ 50 में बेचा जाता है, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी शराब पीने वाले लोगों से चर्चा की तो उन्होंने बताया ₹100 कीमत का क्वाटर 110 से लेकर ₹120 में बेचते हैं, बता दें कि यह टहरौली क्षेत्र में पहली बार नहीं हो रहा अक्सर ठेकेदार और आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ओवर रेटिंग का धंधा फलफूूूल रहा है।
मऊरानीपुर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी तहसील है, जहां पर खुले आबकारी विभाग के कार्यालय पर हमेशा पड़ा रहता है, ताला शोपीस बना हुआ है, जो कभी कभार भूल से खुल जाता है, वह भी इसलिए क्योंकि महीने या हफ्ते में अपना कमीशन प्राप्त करने के लिए, उसके साथ ही आबकारी विभाग में तैनात कर्मचारी व अधिकारी हमेशा गायब रहते हैं, जिसके चलते नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में शराब का कारोबार धड़ल्ले से बिना किसी खौफ के पनप रहा है, अगर किसी के द्वारा शराब के संबंध में शिकायत भी की जाती है, तो कार्यवाही के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जाती है, आपको बता दें कि इस समय मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब का कारोबार बड़े ही पैमाने पर फल फूल रहा है, इस पर अंकुश लगाने में आबकारी विभाग पूर्ण रुप से नाकाम साबित हो रहा है, इतना ही नहीं क्षेत्र में आवंटित हुई शराब की दुकानों पर बिना किसी रोक-टोक के ओवर रेटिंग की जा रही है, तथा दुकानों के आवंटन होने का स्थान कुछ और रहता है, और दुकानें संचालित कहीं और पर हो रही हैं, जिसके संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत भी की गई लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारियों की मेहरबानियों से के चलते हुए कार्यवाही अभी तक नहीं की गई, जिससे साफ स्पष्ट होता है कि उक्त कार्य में आबकारी विभाग का संरक्षण प्राप्त होने से कारोबारी बिना डर के काम कर रहे हैं।