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विभाजन विभीषिका दिवस पर मठ महानुभावों का सम्मान

ByNeeraj sahu

Aug 14, 2025
विभाजन विभीषिका दिवस पर मठ महानुभावों का सम्मान
*राष्ट्र की एकता, अखण्डता सर्वोपरि, प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य
*हम सभी को जाति, धर्म एवं मजहब से ऊपर की ओर देखना चाहिए
*भविष्य में नाम और पत्रिका विभीषिका त्रासदी
       दल: आज संस्कृति विभाग उ0प्र0, अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं जिला प्रशासन के संयुक्त राष्ट्र में हर घर कार्यक्रम के लिए आयोजित विभीषिका स्मृति दिवस विषय पर अभिलेख एवं छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन राष्ट्रीय संग्रहालय में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभाजन के समय मठ द्वीप समूह में निवासरत आदर्श श्रीमती सुंदर कौर जी को शामिल किया गया शाॅल एवं स्मृति चिन्ह सम्मान को अयोग्य घोषित कर दिया गया।
        मा0 जिला पंचायत अध्यक्ष श्री पवन गौतम ने अखंड भारत की आजादी के पीछे की घटना को याद करते हुए कहा कि भारत के विभाजन में असमान मानव और मजबूरी के पलायन की कहानी है। राव ने कहा कि बच्चे भारत का भविष्य हैं, बच्चों के इतिहास की जानकारी देना बहुत जरूरी है। रावे ने बताया कि वीर साहबजादों को दीवार में चुना दिया। वर्तमान सरकार ने इस ऐतिहासिक महत्वपूर्ण घटना को वीर बाल दिवस के रूप में मनाकर उनकी कुर्बानियों को याद किया, जो कि हम सभी के लिए गौरव की बात है।
         कार्यक्रम में मा0 उपाध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान श्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि हम सभी को जाति, धर्म एवं मजहब से ऊपर उठकर शाश्वत राष्ट्रों की एकता एवं अखण्डता को महत्व देना चाहिए। वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान के साथ ही देश की आजादी में तीर्थयात्रियों का योगदान काव्य पाठ पर आधारित है। उन्होंने बताया कि साहस के समय में एक साथ लाखों लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर खाली हाथ घूमते थे। हमें उस समय के रियोडिज़ाइन पर विचार करना चाहिए, जिसमें आगामी समय में समीक्षा शामिल है, फिर भी कभी भी हमारे देश को विभाजित करने की विभीषिका की तरह विडॉमिको का सामना न करना पड़े।
         मुख्य विकास अधिकारी श्री जुनैद अहमद ने कहा कि हम सबसे पहले राष्ट्र के बारे में हैं। रावत ने कहा कि आज के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि हमें इतिहास से सीखना होगा कि हमारे भारत का विभाजन क्यों हुआ? हमारा भारत देश एकता का देश है, ऐसी व्यवस्था अन्य देशों में नहीं है। हम सभी को सदैव संवेदना के साथ देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह करना चाहिए।
          श्रीमती सुरेंदर कौर राइसा ने सांस्कृतिक विभाग, इंटरनैशनल बौध रिसर्च इंस्टिट्यूट एवं जिला प्रशासन की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय को नामांकित करने का निर्देश दिया। हमारे देश में फिर कभी इस तरह की घटना न हो। मछुआरों के सम्मान समारोह के संबंध में कहा गया है कि आज का विशेष दिन डूबया नहीं जा सकता। वर्तमान सरकार ने दुख की इस घड़ी को प्रतिष्ठित किया है जिस पर बहुत गर्व हो रहा है।
          इस दौरान सरदार गुरजीत सिंह ने विभीषिका के विभाजन के समय परिवार के सदस्यों को जिला प्रशासन की देखरेख में नियुक्त किया। रिवायत ने कहा कि परमाणु ऊर्जावान निजीकरण का कार्य करता है और इस प्रकार की घटनाओं को मानव जीवन को कलंकित करने का कार्य करता है। हमारे देश में आगे फिर कभी इस तरह की त्रासदी न हो, हमें हमेशा इस संवेदना के साथ देश के प्रति अपने दायित्वों का पुनरुत्थान करना चाहिए।
    समारोह में उप निदेशक, सरकारी संग्रहालय, मनोज कुमार गौतम ने बताया कि उनकी तारीख 14 अगस्त 1947 है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। एक तरफ देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति मिल रही थी तो वहीं दूसरी तरफ इसकी कीमत देश के टुकड़े के रूप में प्राप्त हो रही थी। रैयत ने बताया कि डिवीजन के नतीजे स्वरुप लाखों लोग नामांकित हो गए जिसके कारण रात-रात पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। हमारे भारत देश के लिए यह विभाजन किसी विभीषिका से कम नहीं था।
        प्रदर्शनी का शुभारम्भ मा0 जिला पंचायत अध्यक्ष श्री पवन गौतम एवं मा0 उपाध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान श्री हरगोविन्द कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर राजकीय संग्रहालय गैलरी में स्थापित प्रभाग विभीषिका पुरालेख प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
        कार्यक्रम के मुख्य विकास अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्री जुनैद अहमद, उप निदेशक राजकीय संग्रहालय श्री मनोज गौतम, सहायक निदेशक सूचना श्री सुरजीत सिंह एवं श्री गुरजीत सिंह, श्री अशोक अग्रवाल, पिपरी तिवारी, श्रीमती अंजलिग्रीव, श्रीमती रिंकीग्रीव, श्री सोम तिवारी, सुदर्शन सिंह, डोमैन मनु, श्री मि.
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