एक दिन पहले भी कोंच तहसील में फील्डिंग सजाई एंटीकरप्शन टीम ने
_*कानूनगो के किसी काम से जिला मुख्यालय चले जाने के कारण अपना जाल समेटना पड़ा था एंटीकरप्शन टीम को*_
*कोंच* कोंच के बहुचर्चित रिश्वतखोर कानूनगो कांड में झांसी से आई एंटीकरप्शन टीम द्वारा शुक्रवार को तहसील कोंच में कानूनगो व उसके दो अन्य साथियों को रिश्वत में दी गई रकम के साथ रंगेहाथों पकड़ा गया था। इस गिरफ्तारी के लिए टीम ने जिस तेजी से होमवर्क किया था, वह काबिले तारीफ है। टीम ने एक दिन पहले भी यानि 19 दिसंबर को भी तहसील परिसर में अपनी फील्डिंग सजाई थी लेकिन कानूनगो के किसी काम से जिला मुख्यालय चले जाने के कारण टीम को अपना फैलाया गया जाल समेटना पड़ा था। एंटीकरप्शन टीम ने जो रिपोर्ट बनाई है उसमें इस बात का साफतौर पर जिक्र किया गया है कि जब शिकायतकर्ता राधा ने तथ्यों सहित पूरे मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन से की तो फौरन ही सारी औपचारिकताएं पूरी करते हुए टीम ने 19 दिसंबर को ही कोंच में डेरा डाल लिया और तहसील परिसर में पूरा जाल बिछा कर राधा को कानूनगो के पास रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा गया था लेकिन राधा को बताया गया कि आज कानूनगो किसी काम से उरई गया है। इस पर एंटीकरप्शन टीम को अपना बिछाया गया जाल समेटना पड़ा था। इसके बाद 20 दिसंबर को दोबारा बिछाए गए जाल में कानूनगो व उसके दो साथी फंस ही गए। गौरतलब है कि तहसील क्षेत्र के परैथा गांव की रहने वाली राधा के शिक्षक पति शिवेंद्र सिंह पटेल का 30 अगस्त को तैनाती स्थल जौनपुर में निधन हो गया था। राधा ने कोंच तहसील में वारिस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दो महीने पहले आवेदन कर रखा था और तभी से वह कानूनगो कृष्णाबाबू खरे के चक्कर काट रही थी लेकिन कानूनगो बिना पैसा लिए काम करने को राजी नहीं था जबकि राधा अपने इस लीगल काम के लिए पैसा देने के मूड में नहीं थी। इसलिए उसने ये पूरा जाल बुन डाला और कानूनगो को रंगेहाथों एंटीकरप्शन टीम के हाथों पकड़वा दिया।
*नौकरी के आखिरी दिनों में सब कुछ खो दिया कानूनगो कृष्णा खरे ने*
_*कोंच* जरा सा लालच कभी-कभी जीवन भर की मेहनत पर पानी फेर देता है, ऐसा ही कुछ हुआ है रिश्वत लेते पकड़े गए कानूनगो कृष्णा बाबू खरे के साथ। वह भी ऐसे समय में जब रिटायरमेंट के लिए महज छह महीने रह गए हों। एंटीकरप्शन टीम की छापेमारी में अपने दो दलालों के साथ रंगेहाथों पकड़ा गया कानूनगो कृष्णबाबू खरे वर्ष 2022 में कानूनगो बना था और जुलाई 2025 में उनका रिटायरमेंट भी होना था। 2022 में जालौन तहसील से पदोन्नति के उपरांत तहसील कोंच में वह कानूनगो बन कर आया था। कानूनगो का परिवार और पूरा स्टाफ उसके रिटायरमेंट के इंतजार में था लेकिन ये किसी को पता नहीं था कि कानूनगो साहब का जरा सा लालच उसके पूरे जीवन को ही बर्बाद करके रख देगा। विभागीय कार्रवाई के बाद रिश्वतखोर कानूनगो को भारी सामाजिक और आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ेगा।_