जालौन:-आजादी के अमृत महोत्सव में आज हम आपको रुबरु कराने जा रहे हैं जनपद जालौन की एक ऐसी तीन पीढ़ियों से जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में एक साथ भाग लिया था। हम बात कर रहे हैं जनपद जालौन के कोंच नगर क्षेत्र में रहने वाले रामदीन पहारिया उनके बेटे पन्नालाल पहारिया तथा उनके नाती जयदेव पहारिया के बारे में जिन्होंने सन् 1930 में स्वतंत्रता आंदोलन में एक साथ शामिल होकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नमक आंदोलन चलाया था और लोगों को जागरूक किया था कि अंग्रेजी हुकूमत का नमक किसी भी हालत में नहीं खाना है। इसके लिए उन्होंने गांव गांव जाकर लोगों को इस आंदोलन में शामिल किया। इस बात की भनक जब अंग्रेजी हुकूमत के हुक्मरानों को लगी तो उन्होंने अपनी सेना भेजकर घेराबंदी कर तीनों को पकड़कर हवालात में डाल दिया था। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो भारत सरकार ने इन तीनों को एक साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घोषित किया और राजकीय सम्मान से सम्मानित किया। लेकिन रामदीन पहारिया ने सरकार को कहा कि वह आपके सम्मान को स्वीकार तो करते है लेकिन इससे मिलने वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं लेंगे क्योंकि उन्होंने देश की आजादी के लिए निस्वार्थ भाव से अपना काम किया है। इस संबंध में इतिहासकार डा जगदीश प्रसाद गुप्त बताते हैं कि उनके द्वारा दिए गए योगदान को जनपद जालौन जिले में गौरवशाली इतिहास दिखाई देता है और ये सम्मान की बात है जनपद जालौन वासियों और देश वासियों के लिए।