सरकार की गलत नीतियों ने हमारी युवाशक्ति को नकारा ट्रोल्स की फौज में बदल दिया है! – कैलाश चन्द मिश्रा (पुर्वांचली
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पुर्वांचल के राष्ट्रीय महा सचिव कैलाश चन्द मिश्रा ने कहा कि रोजगार के अभाव में आज के युवाओं के पास खूब सारा खाली समय और बहुत सारा सस्ता इंटरनेट डाटा मौजूद है।
कैलाश चन्द मिश्रा के विचारों से आप लोग भली भांति अवगत होगे। उनके विषय और उद्देश्य किसी से छिपा नहीं है। समाज का सबसे कमजोर आदमी भी इज्जत से जी सके और व्यवस्था में उसकी भी भागीदारी सुनिश्चित हो, बस यही तो उनका उद्देश्य है। आखिर इसमें गलत भी क्या है?
उनका कहना है कि एक गरीब आदमी के पास अगर जीवन की बुनियादी चीजों मसलन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है तो क्या मैं आँखें बंद कर लूं?
या इसके लिए जिम्मेदार लोगों और व्यवस्थाओं पर उंगली उठाना छोड़ दूं?
दिक्कत ये है कि हम सभी एक अच्छी व्यवस्था में रहना चाहते हैं, पर खुद कुछ भी नहीं करना चाहते हैं! और जो लोग कुछ करना भी चाहते हैं। बाकी लोग अपनी कुछ न करने की गिल्ट के चलते उन्हें डिमोरलाइज़ करने में जुट जाते हैं।
जाहिर है *अगर आप समाधान का हिस्सा नहीं हैं! तो आप खुद समस्या हैं. वाली बात काफी हद तक सही है।
आज जिस प्रकार सत्ता में बैठे सत्ताधारी दल एक विशेष राजनीतिक दल कि छवि खराब करके सस्ती लोकप्रियता प्राप्त कर सत्ता में बैठ कर अपने पद का दुरप्रयोग कर इस कृत्य मे जुड़े हैं। क्या इससे देश या देश युवा विकास की ओर अग्रसर हो पाएगा या देश का युवा जो बेरोजगार हैं उसे रोजगार प्राप्त होगा। यह देश हीत मे नही है। क्योंकि आज नहीं तो कल दूसरे दलों का भी सत्ता में वापसी होगा तो क्या इसी प्रकार का कृत्य वे भी करेंगे क्या वह देश हीत मे होगा। इससे देश का विकास होगा। जिस देश मे युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाता है। वहीं देश आगे बढ़ता है।
किसी के स्वाभिमान को बार – बार ठेस पहुंचाना अच्छी बात नहीं है।
जिस तरह से आज देश मे चारों तरफ बेरोजगारी व अव्यवस्था का आलम है।
कभी इसे इन्टरनेशनल लेबल पर जोड कर देखेगे तो आप को क्या किसी को भी अच्छा नही लगेगा कि हमारे देश का नाम किस तरह राजनीतिक दल आपसी छीटा कसी के कारण पहुचाने का काम कर रहे हैं। इन सब से उप उठ कर कार्य करें! जिससे कि देश का गौरव एवं आपका भी नाम रोशन हो।
देश हित के लिए राजनीतिज्ञो को अपने आपको सुधारने कि जरूरत है। युवाओं के हाथों में रोजगार देने कि जरुरत है। ना कि सत्ता के लालच मे धार्मिक उन्माद फैलाने व ट्रोल आर्मी का हिस्सा बनाने कि जरूरत है।
जिसके लिए मैं लंबे समय से संघर्षरत हूँ। अगर फिर भी सुधार नहीं लाया गया तो ऐसे लोगों के खिलाफ आन्दोलन चलाना पड़ा तो वह भी करेंगे। कुछ राजनीतिक दलों मे बैठे लोग अगर नही सुधरे तो उन्हें मेरी विरोधी मुहिम का सामना करना पड़ेगा।
बार – बार धार्मिक उन्माद, जातिवाद के नए संस्करण, इंटरनेट पर फूहड़ कंटेंट का वायरल हो जाना, इसी ट्रोल आर्मी का किया धरा है, जो कि असल में खुद विक्टिम हैं. ऐसे में उन धागों और हाथों की पहचान बेहद जरूरी है जो आज युवाओं को कठपुतली की तरह नचा रहे हैं।
मेरा संघर्ष जारी…है। और जारी रहेगा।
कुछ तो ट्रोल कहेंगे, ट्रोल का काम है कहना…