
गौशाला के नाम पर बेजुबान जानवरो का निवाला कर रहे हजम-=-रिपोर्ट-रविकांत द्विवेदी, जालौन, यूपी
गौशाला बनी शोपीस अन्ना जानवर खड़ी फसलो को कर रहे चट
पिरौना (जालौन) कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम पिरौना, इगुइखुर्द, विरगुवाखुर्द, में बनी गौशाला में गायें दिन पे दिन अपना दम तोड़ रही हैं जब गांव में बनी गौशाला को स्वयं जाकर देखा तो देखा गायों को खाने के लिए घास व भूसा नही यहां तक की पीने के लिए पानी तक कि व्यवस्था नही ऐसे में अब सर्दी का मौसम शुरू हुआ ऐसे में उन्हें ठंड से बचाने के लिए भी कोई व्यवस्था नही की जब गौशाला में गायों को भूसा की तरह बंद करके और खाने पीने के लिए भी कोई व्यवस्था नही की पिरौना गांव निवासी मनीष तिवारी, प्रमोद खरे, अजय चौधरी, मुन्ना राठौर, बृजमोहन वर्मा, छुन्ना पांचाल, आनंदस्वरूप मिश्रा, मुन्ना चौधरी, राजू चौधरी, बसन्ते चच्चा, बालमुकुंद रजक, मिंटू प्रजापति, रामबालक ने बताया कि हम सभी लोग मिलजुलकर जो कुछ थोड़ा बहुत बनता हैं तो गायों को खिला देते है और कभी कभार घर पर होते है तो पानी भी पिला देते हैं साथ ही बताया कि जब से गौशाला बनाई गई तब से लेकर अब तक कोई भी शासन का अधिकारी व कर्मचारी यहां पर भ्रमण करने नही आया शिकायत करने के बाद भी कुछ नही होता उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने गांव गांव में गायों के लिए स्थाई गौशालाएं बनवा रहे जिससे गायों को रहने के लिए स्थाई जगह हो और उनके रहने से लेकर खाने पीने का भी ख्याल रखा जाए इसके लिए उन्होंने हर गौशालाओ के लिए पैसों की स्वीकृति भी कर चुके हैं लेकिन ये तो अपनी जेबें गर्म करने में लगे हुए हैं अब आप पूछेगे की यह कौन है जो जेबे गर्म कर रहे हैं चलो फिर आपको बता ही दे कि ये कौन हैं जो बेजुबानों जानवरों को भी नही बक्श रहे यह अपने ही ग्राम के सरपंच (प्रधान) जो सचिव और बीडीओ की मिलीभगत से बेजुबान जानवरो का भोजन हजम करने में लगे हुए हैं और बेचारे जानवर दर दर मारे मारे भटक रहे है अब ऐसे में भूखे प्यासे जानवर किसानों के खेतों में टूट पड़ते हैं जिससे दिन पे दिन किसान भी आत्महत्या कर रहे हैं गौशाला की बात की जाए तो इसमें ठंड से बचने के लिए कोई साधन उपलब्ध नही चारो तरफ से तेज ठंडी हवा आती हैं जिससे गाये अपना दम तोड़ रही हैं गौशाला तो मात्र एक जरिया बन गया है पैसा कमाने का गौशाला के नाम पर जो पैसा स्वीकृत होता है वह सारा पैसा अगर गौशाला में लगाया जाए तो गायों को समय पर घास भूसा व पानी की समस्या से निजात मिल जाये लेकिन ऐसा नही
क्या कहते है जिम्मेदार
जब इस सम्बंध में हमारे संवाददाता ने सचिव से बात की तो उन्होंने बताया कि ऐसा बिल्कुल भी नही है गायों को समय पर घास, भूसा, पानी व ठंड से बचाने के लिए तीन शेड व तिरपाल लगवाई हैं जब पूछा गया कि प्रतिदिन गाये क्यो अपना दम तोड़ रही हैं तो कोई जबाब नही दिया लेकिन वास्तविकता से देखा व परखा गया तो साफ ही नजर आया और ऐसे ही गांव इगुइखुर्द व विरगुवाखुर्द के कुछ लोगो ने भी बताया कि सचिव अपनी सफाई दे रहा हैं यह गांव में एक भी दिन नही आता और गाये गौशाला में अपना दम तोड़ देती हैं और दो तीन दिन हो जाते और गौशाला में ही सड़ती रहती तीन तीन दिन तक कोई देखरेख नही होती जब कोई व्यक्ति शिकायत करता तो ऊपर से किसी अधिकारी या कर्मचारी का फोन आता तो तभी गौशाला आकर उसको मरे हुए जानवर को बाहर निकलवाकर गांव से कुछ दूरी पर सड़क किनारे ट्रेक्टर से बांधकर कडोरकर फैक देते जिससे बाद में कुत्ते पक्षी व सुअर गायों को नोच नोच कर खाते रहते