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दर्पण में रूप देखने की अपेक्षा मन के दर्पण में खुद को निहारो,जीवन में उजाला हो जाएगा:जैन मुनि,करगुवां

झांसी । मूल में भूल है और चूल पर फूल खिलाने की सोच रहे हो । शरीर एक दर्पण है । दर्पण के अंदर जो दिख रहा है उसके भीतर के दाग साफ करने की जरुरत है न कि दर्पण के ऊपर लगी भूल को साफ करना है । यह सदवचन करगुवां जी में धर्मसभा को संबोधित करते हुये आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी ने कहे । उन्होंने कहा कि मत रुप निहारो दर्पण में, दर्पण धुंधला हो जायेगा, निज रुप निहारो अन्तर में जीवन उजला हो जायेगा । आर्यिका पूर्णमति ने कहा कि जब तक हमारे भीतर में गंदगी है, तब तक हमारे भीतर परमात्मा का वाश नहीं हो सकता । जहां गुरुओं, देवशास्त्रों का सम्मान न हो वहां कभी तरक्की नहीं हो सकती । साथ ही पूर्व में किये पुण्य का भी क्षरण हो जाता है । नरकगामी बनने एवं विषय भोग के लिए मत जिओ, उन्होंने कहा कि हम दूसरों को प्रसन्न करने के तमाम प्रकार के प्रयत्न तो करते हैं परंतु अपनी आत्मा को प्रसन्न करने का प्रयत्न नहीं करते । जबकि यदि आत्मा प्रसन्न हो गयी तो परम आनंद की प्राप्ति हो जाती है ।
आर्यिका ने कहा कि दर्पण (कांच के टुकड़े) को जो भी देखता है उसे उसमें स्वयं का चेहरा नजर आता है, दूसरे का नहीं इसी तरह अलग-अलग लोग अलग-अलग विचारों के भी हो सकते हैं । समाज एवं परिवार में भी पृथक-पृथक विचारों के लोग होते हैं । किंतु जब परिवार के लोगों में विचार न मिले तो आपसी मतभेद बढऩे लगते हैं । इससे बचने का उपाय बताते हुये उन्होंने कहा कि बेहतर होगा देवशास्त्रों की वाणी से विचार मिलाओ और आपस में प्रेम करो । आपस में विचार न मिले तो पति-पत्नि को एक-दूसरे का विरोध नहीं बल्कि मौन रहना चाहिए । उन्होंने सीख देते हुये कहा कि अलग-अलग दर्पण में मत झांकों । एक साथ एक ही दर्पण में देखो तो दोनों के चेहरे दिखाई जरुर देंगे ।
सिद्धचक्र महामण्डल विधान आज से–
अतिशय क्षेत्र करगुवां जी में आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी के पावन सानिध्य में अष्टानिका महापूजन का महापर्व शुक्रवार 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है जो 27 जुलाई तक चलेगा । यह जानकारी चातुर्मास कमेटी के मीडिया प्रभारी सौरभ जैन सर्वज्ञ ने दी । प्रारंभ में श्रीमती रजनी जैन ने मंगलाचरण किया । प्रकाशचंद्र जैन, डा. अभिषेक जैन, अशोक जैन रत्न सेल्स ने गुरुवर के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्जवलित किया। संचालन संजय कर्नल ने एवं आभार प्रवीण कुमार जैन ने व्यक्त किया ।

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