हाईपर रियलिस्टिक फोटो एडिटर जेमिनी एआई टूल- नैनो बनाना, हमारी प्राइवेसी के लिये खतरा : लॉ प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित
देहरादून ! आज 21 सितंबर अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर आयोजित विधिक गोष्ठी में साइबर डाटा प्राइवेसी पर चर्चा करते हुए उत्तराँचल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित नें कहा कि, आजकल सोशल मीडिया में नये नये ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहे है जैसे गिबली ट्रेंड ने खूब चर्चा बटोरी वही अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश ( AI ) साड़ी ट्रेंड वायरल हो गया है जिसमे लड़किया अपनी निजी तस्वीरें गूगल जेमिनी जैसे एआई टूल्स पर अपलोड कर इन तस्वीरों को आकर्षक रूप में बदलवा रही हैं। इस ट्रेंड में युवा ही नहीं बड़ी उम्र के लोग भी दिलचस्पी ले रहे हैं।
कानूनी प्रश्न यह है कि क्या अपनी निजी तस्वीरें ऐसे एआई प्लेटफ़ॉर्म पर लोड करना वाकई सुरक्षित है ?
भारत में “डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023” लागू है, जो डेटा को सुरक्षित रखने और उसके इस्तेमाल पर सख्त नियम बनाता है। इस कानून के तहत बिना यूज़र की सहमति किसी भी डेटा का उपयोग नहीं किया जा सकता और यूज़र्स को अपने डेटा पर विधिक नियंत्रण प्रदान करता है l इस कानून में प्राइवेसी तोड़ने पर सख्त जुर्माना का भी प्रावधान है लेकिन इसे सही तरह से लागू करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
इंस्टाग्राम एप में अभी तक गूगल नैनो बनाना एआई ( AI ) से साड़ी वाली फोटोज का एडिटिंग टूल 50 करोड़ से ज्यादा फोटोज को एडिट कर चुका है।
ऑनलइन फोटो एडिटिंग टूल में हम “निजता का कानूनी अधिकार” भी खो देते है क्योंकि तस्वीर बनाने के लिए सहमति हम स्वयं देते है साथ ही रेफरेंस फोटो भी हम खुद देते हैं. ऐसे में आपकी कई सारी जानकारी आप सार्वजनिक रूप से खुद देते हैं. इंटरनेट पर जो चीज एक बार चली गई वो कभी खत्म नहीं होती. किसी भी ( AI )टूल से तस्वीर बनाने से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि आप अपनी डिजिटल पहचान पर नियंत्रण खो देते हैं.
जब आप अपना फोटो ( AI ) इमेज जनरेटर पर अपलोड करते हैं, तो आप इस बात से नियंत्रण खो देते हैं कि उनका उपयोग कैसे होगा. उस फोटो के साथ ( AI ) को वो डिटेल्स भी मिल सकते हैं जिन्हें आप शेयर नहीं करना चाहते, जैसे- लोकेशन, फोटो के बैकग्राउंड में दिख रहे आपकी पर्सनल जानकारियां भी शामिल है.
डॉ. अनिल दीक्षित नें कहा कि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश ( AI ) के ज़रिये अपनी तस्वीर को रेट्रो साड़ी लुक में बदलकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का यह ट्रेंड फैशन बन गया है यूजर्स इसे एंटरटेनमेंट और समय बिताने का साधन भी मान रहे है। यही कारण है कि ( AI साड़ी ट्रेंड ) इतनी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है यह एक चिंता का विषय है एवं निजता के अधिकार के भंग होने से इसके दुष्परिणामो के प्रति सचेत रहने की ज़रूरत है l
अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति द्वारा आयोजित इस विधिक गोष्ठी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साइबर स्पेश रेगुलेशन पर बल दिया गया l गोष्ठी में अरुण कुमार, डॉ. रवि अग्रवाल, श्री पुष्पेंद्र यादव, डॉ. मिना तिवारी, श्री राघवेन्द्र सिँह नें विश्व परिपेक्ष में गुणात्मक सुधार एवं जागरूकता पर अपने विचार रखें l