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रामकथा के सातवें दिन: भगवान की बाल लीलाओं का जीवंत वर्णन

ByNeeraj sahu

Dec 4, 2024

रामकथा के सातवें दिन: भगवान की बाल लीलाओं का जीवंत वर्णन

झाँसी, 4 दिसंबर: झाँसी के एंब्रोसिया सिटी के सामने, मैन रोड, हंसारी में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का मनमोहक और हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिवाकांत जी महाराज ने अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल की मधुर स्मृतियों से सराबोर कर दिया।

बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन
महाराज जी ने श्रीराम के बाल्यकाल की दिव्य घटनाओं का भावपूर्ण चित्रण किया:
जन्मोत्सव की खुशी:
जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ, तो समस्त नगर में आनंद और उल्लास का वातावरण था। महाराज जी ने बताया कि यह क्षण केवल अयोध्या के लिए नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के लिए मंगलकारी था।
माता कौशल्या की गोद में रामजी के बाल स्वरूप का वर्णन कर उन्होंने बताया कि भगवान का यह रूप समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।
मातृ-पितृ सेवा का उदाहरण:
बालक राम ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में ही सेवा, कर्तव्य और सम्मान के आदर्श स्थापित किए।
महाराज जी ने बाल्यकाल में माता कौशल्या और राजा दशरथ के प्रति उनकी श्रद्धा और आज्ञापालन की घटनाओं का उल्लेख किया।
सखा भाव और भाईचारे का संदेश:
भगवान राम अपने भाइयों के प्रति अगाध स्नेह रखते थे। उनकी बाल लीलाओं में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ खेल-कूद का वर्णन करते हुए उन्होंने सच्चे भाईचारे और सहयोग का महत्व समझाया।

बाल लीलाओं का हमारे जीवन में महत्व
महाराज जी ने भगवान राम की बाल लीलाओं के माध्यम से जीवन में सादगी और समर्पण का महत्व समझाया।
बालक राम से सीख:
बाल्यकाल से ही भगवान ने यह सिखाया कि जीवन में अनुशासन और कर्तव्यपालन का महत्व सर्वोपरि है।
अपने माता-पिता और गुरुजनों के प्रति आदर और सेवा ही सच्चा धर्म है।
समाज के लिए प्रेरणा:
आज के युग में, जहां पारिवारिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, भगवान राम का बाल्यकाल सिखाता है कि परिवार का आदर और परस्पर प्रेम ही समाज की आधारशिला है।
जीवन के लिए संदेश
बालपन की सादगी:
भगवान राम का बाल स्वरूप यह सिखाता है कि सरलता, सच्चाई और सेवा का जीवन में कितना महत्व है।
परिवार के प्रति समर्पण:
माता-पिता और भाइयों के प्रति भगवान राम का प्रेम आज के समाज के लिए आदर्श है।
स्नेह और भाईचारे का महत्व:
भगवान राम का जीवन यह सिखाता है कि परस्पर प्रेम और सहयोग ही समाज को एकजुट रखता है।
महाराज जी का संदेश
“भगवान श्रीराम का बाल्यकाल हमें जीवन में सरलता, भक्ति और सेवा का महत्व सिखाता है। उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर हम अपने परिवार और समाज को एक मजबूत आधार दे सकते हैं।”
राम कथा दिवसा में उपस्थिति निम्न प्रकार से रही।

जितेन्द्र गुप्ता, राजेश महाजन , पवन विश्वकर्मा ने आज अपने पुत्र देव के जन्मदिवस पर कथा में खिचड़ी का प्रसाद वितरण कराया एवं सभी लोगो ने व्यास जी को, माला पहनाकर स्वागत किया एवं शोभाराम, शिवशंकर राय
राकेश राय, अमित, प्रशान्त, नरेन्द्र कुमार राय, मानू राय, राकेश राय, मदनराय, कृष्ण बिहारी राय आदि रहे
अन्त में व्यास जी कहा कि जितेंद्र रघुवीर राय द्वारा 06/12/24 को 21 कन्याओं की शादी की जा रही है। जो किसी एक व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा कार्य अनुकरणीय कार्य है।

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