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231122नॉन इंटलॉकिंग कार्य के कारण निम्नलिखित साप्ताहिक गाड़ियों का निरस्तीकरण करने का निर्णय लिया गया है,

ByNeeraj sahu

Oct 19, 2024

रेल प्रशासन द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी -कानपुर सेन्ट्रल खंड के उसरगांव-कालपी-चौंराह (14 किमी) के मध्य दोहरीकरण कार्य हेतु हो रहे नॉन इंटलॉकिंग कार्य के कारण निम्नलिखित साप्ताहिक गाड़ियों का निरस्तीकरण करने का निर्णय लिया गया है,

गाड़ियों का निरस्तीकरण-

क्रं.सं.

गाड़ी सं.

कहाँ से – कहाँ तक

दिन

प्रारंभिक स्टेशन से निरस्तीकरण की तिथि

फेरे

1

12103

पुणे -लखनऊ

साप्ताहिक

29.11.22

1

2

12104

लखनऊ –पुणे

साप्ताहिक

30.11.22

1

3

11407

पुणे -लखनऊ

साप्ताहिक

29.11.22

1

4

11408

लखनऊ –पुणे

साप्ताहिक

01.12.22

1

5.

09465

अहमदाबाद-डिब्रूगढ़

साप्ताहिक

25.11.22

1

6.

09466

डिब्रूगढ़ – अहमदाबाद

साप्ताहिक

28.11.22

1

 

(2)

झाँसी मंडल अवसंरचनात्मक विकास कार्यों में निरंतरता बनाये रखे है | इसी क्रम में आज दिनांक : 23.11.22 को मंडल रेल प्रबंधक आशुतोष के दिशानिर्देशन में बानमोर – सिकरोदा रेलखंड स्थित समपार फाटक संख्या 440 के ऑपरेटिंग पैनल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है | नई बिल्डिंग में शिफ्ट होने के साथ-साथ उक्त प्रणाली को उच्चीकृत करते हुए धोलपुर-बानमोर तीसरी लाइन से कनेक्टिविटी हेतु अनुकूल बनाया गया | इसी क्रम में समपार फाटक पर नया बूम बैरियर भी संस्थापित किया गया | पुराने रोटरी टाइप पैनल के स्थान पर अब नया पुश बटन टाइप ऑपरेटिंग पैनल संस्थापित किया गया है | इसके अतिरिक्त नया समपार फाटक सिस्टम डेटा लॉगर, ड्यूल फ्यूज अलार्म सिस्टम सहित अन्य विशिष्ट फीचर्स युक्त है |

(3)

रेलवे वर्कशॉप झांसी का 127 वां स्थापना दिवस

वैगन मरम्मत कारखाना झांसी भारत का सबसे बड़ा वैगन मरम्मत कारखाना है | कारखाने का निर्माण कार्य 1889 में इंडियन मिडलैंड रेलवे के द्वारा प्रारंभ कराया गया तथा 25 नवंबर 1895 को इस कारखाने का शुभारंभ हुआ |

शुरूआत में कारखाने में स्टीम लोकोमोटिव के सामानों की फोर्जिंग एवं उनका आवधिक ओवर हौलिंग का कार्य होता रहा, कालांतर में कोच और वैगन फोर व्हीलर इनका भी आवधिक ओवर हौलिंग का कार्य होता रहा तथा बाद में इस कारखाने को केवल वैगनो के आवधिक ओवर हौलिंग के लिए निर्धारित लक्ष्य दिया गया |

झांसी कारखाना स्टील वैगनो को बनाने वाला पूरी भारतीय रेलवे में सर्वप्रथम कारखाना बना है | आज यह कारखाना प्रतिमाह 700 वैगन को दुरुस्त कर एक कीर्तिमान बना रहा है |

25 नवंबर 2022 को इस कारखाने का 127 वां स्थापना दिवस है, जिसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है | इस दौरान चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे जिसमें ….

· दिनांक 24 नवंबर 2022 को कारखाना के महिला एवं पुरुष कर्मचारियों की एकल गायन प्रतियोगिता का कार्यक्रम ऑडिटोरियम में रखा गया है |

· दिनांक 25 नवंबर 2022 को अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा झांसी कारखाने के दंगल ग्राउंड में शाम 6:00 से 9:00 तक रखा गया है |

· दिनांक 26 नवंबर 2022 को राधा प्रजापति एंड पार्टी द्वारा बुंदेली नृत्य का कार्यक्रम भी कारखाना दंगल ग्राउंड में शाम 6:00 से 9:00 के मध्य रखा गया है |

· रविवार दिनांक 27 नवंबर 2022 को कारखाने के अंदर हेरिटेज पार्क में एक पिकनिक एवं आर्केस्ट्रा का आयोजन भी रखा गया है |

इसके अलावा इन तीनों दिनों में कारखाने के अंदर टेक्निकल क्वीज, पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन, पेपर प्रेजेंटेशन, ग्रुप क्विज, इत्यादि कार्यक्रम भी रखे गए हैं |

 

रेल मरम्मत कारखाने का विस्तृत परिचय :

झॉसी कारखाना सन् 1895 में केन्द्रीय कारखाना के नाम से इंडियन मिडलैंड रेलवे द्वारा बनाया गया ।

सन् 1910 में इंडियन मिडलैंड रेलवे को जी.आई.पी. रेलवे ( ग्रेट इंडियन पैनिसुला ) के साथ समायोजित कर दिया गया एवं सम्पूर्ण प्रबन्धन जी.आई.पी. रेलवे को स्थानान्तरित कर दिया गया । झॉसी कारखाना सन् 1895 में सम्पूर्ण रूप से तैयार कर लिया गया । कारखाना का नाम लोको, कैरिज एण्ड वैगन वर्कशाप रखा गया । इसमें लाको, कैरिज (सवारी डिब्बा) , वैगन (मालवाहन डिब्बा) के आवधिक ओवर हॉलिंग (पी.ओ. एच.) का कार्य प्रारम्भ किया गया । सन् 1930 में पुनः जी.आई.पी. रेलवे के रि-आर्गनाइजेशन के कारण लोकोमोटिव मरम्मत का कार्य परेल कारखाना मुम्बई (बम्बई) स्थानान्तरित कर दिया गया । सन् 1961 में इस कारखाना का वृहद विस्तार और विकास किया गया तथा उत्पादन का निर्धारित लक्ष्य 30 यूनिट से बढ़ाकर 45 यूनिट प्रतिदिन किया गया । इस विस्तार में लगभग 2 करोड़ रूपया अनुमानित व्यय किया गया, जिसमें नये वैगन रिपेयर, रोड का निर्माण, कैरिज लिफ्टिंग, निरीक्षण पिट आदि का कार्य हुआ । इसी समय चितरंजन पद्धति के आधार पर प्रोत्साहन पद्धति कारखाना में प्रारम्भ की गई । रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार सन् 1961-62 में चार पहिया 2000 के.सी. (ओपिन) वैगनों , 50 गुड्स ब्रेकवानों, 1622 हैवी ऑयल टैंक वेगनों के अन्डर फ्रेम तथा 159 कन्टेनर निर्माण का कार्य आवंटित किया गया । जो 1967 तक पूर्ण किया गया । यह कार्य अधिशेष कर्मचारियों को कारखाना में ही समायोजित करने के कारण प्राप्त हुआ था । सन् 1965 में मांढुंगा कारखाना से बॉक्स एव बी.सी.एक्स. मालवाहनों का आवधिक ओवर हॉलिंग का कार्य झॉसी कारखाना स्थानान्तरित किया गया । सन् 1974 में कारखाना का उत्पादन लक्ष्य पुनः 52 यूनिट प्रतिदिन से बढ़ाकर 72 यूनिट प्रतिदिन निर्धारित किया गया । सन् 1990 मार्च से आधुनिक तकनीकी से युक्त एयर ब्रेक प्रणाली वाले बॉक्स-‘ एन ‘ , बी.सी.एन. का आवधिक ओवर हॉलिंग कार्य प्रारम्भ हुआ । सन् 1992 बॉक्स वैगनों को फलैट कन्टेनर मालवाहनों में परिवर्तन करने का कार्य किया गया एवं निर्धारित लक्ष्य 300 बॉक्स वैगनों के स्थान पर 306 बॉक्स वैगन कन्टेनर फलैट में परिवर्तित किये गया । सन् 1995 में 25 नवम्बर को झॉसी कारखाना ने अपने स्थापना दिवस के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशाल शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। सन् 1995 में ही झॉसी कारखाना का आधुनिकीकरण समयानुसार आधुनिक तकनीकी के दृष्टिकोण को देखते हुए प्रारम्भ किया गया ।

इसके अन्तर्गत बॉक्स- एन . / बी.सी.एन. मालवाहनो के मरम्मत दिन कम करके अधिक से अधिक मालवाहनों की निकासी के लक्ष्य को मूलरूप में रखा गया । सन् 1996 में कारखाना में टैंक वैगन मालवाहनों के पी.ओ.एच. का कार्य प्रारम्भ किया गया । अनेक उपलब्धियों एवं चुनौती पूर्ण कार्यों को पूर्ण करते हुए एशिया महाद्वीप में मालवाहन मरम्मत कारखाना का स्थान भारतीय रेल में सर्वोपरि प्रथम स्थान पर है । वर्ष 2001 में झॉसी कारखाना ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गुणतत्ता एवं ग्राहकों की संतुष्टि के अनुरूप अपनी उत्कृष्ट सेवा के निरन्तर सुधार करने का दृढ़ संकल्प करते हुए आई.एस.ओ. मानक प्रमाण पत्र 9001:2000 जून 2001 में प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया एवं निरन्तर अपने कर्मयोगी कर्मचारियों को प्रोत्साहित कर उन्हें गुणतत्ता पूर्ण करने के लिए अभिप्रेरण का कार्य कर रहा है । तकनीकी प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने एवं अग्रिम पंक्ति के पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षिण देने के लिए सन् 1919 में राजकीय टेक्नीकल स्कूल की स्थापना राज्य सरकार के अधीन प्रारंभ की गई । सन् 1958 इस स्कूल को रेलवे ने अपने अधीन अधीकृत कर लिया और इसका नया नाम रेलवे ट्रेनिंग स्कूल रखा गया । सन् 1961 में इसके नाम को पुनः परिवर्तित कर सिस्टम टेक्निकल स्कूल किया गया एवं सन् 1902 से इसका नाम सुपरवाईजर्स ट्रेनिंग सेन्टर किया गया । सभी आधुनिक ट्रेनिंग ऐड संसाधनो से युक्त यह ट्रेनिंग सेन्टर अन्तर्राष्ट्रीय मानक संगठन द्वारा आई.एस.ओ. 2001-2000 प्रमाणपत्र से उत्कृष्ट प्रशिक्षण हेतु प्रमाणित किया गया । झॉसी कारखाना में सीधी भर्ती कोटे के अन्तर्गत एवं दयाधार पर नियुक्त अभ्यार्थियों तथा एक्ट अप्रेन्टिस प्रशिक्षुओं व अन्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण हेतु बुनियादी प्रशिक्षण केन्द्र भी झाँसी कारखाना में संचालित किया जा रहा है । कारखाना का अपना संगणक केन्द्र भी सभी आधुनिक सुविधा जैसे रेलनेट, ई – मेल , आदि युक्त है ।

सन् 1913 में कारखाना में स्टीम पावर हाउस बनाया गया । सन् 1932 में इसकी उत्पादन क्षमता 2250 किलोवाट थी । आज उत्तर प्रदेश विद्युत निगम द्वारा झॉसी कारखाना को पावर प्राप्त हो रहा है । झॉसी कारखाना में मजदूरी के कल्याण एवं हित तथा उनके मनोरंजन, स्वास्थ्य आदि के लिए कारखाना स्टॉफ कैन्टीन, 450 दर्शक क्षमता का ऑडिटोरियम, सांस्कृतिक अकादमी के अन्तर्गत कारखाना का उत्कृष्ट ऑरकेस्ट्रा, एलोपैथिक , आयुर्वेदिक एवं होमियोपैथिक इलाज की उत्तम सुविधा , आवासीय सुविधा के अलावा प्रशासन ने बैंक, पोस्ट ऑफिस आदि कारखाना परिसर में कर्मचारियों को उचित लाभ एवं सुविधा के दृष्टिकोण पर्यावरण की दृष्टिकोण के अन्तर्गत कारखाना में कर्मचारियों द्वारा सुन्दर बाग – बगीचे कारखाना परिसर में लगाये गये है । जिनकी देखभाल सभी कर्मचारी मिलजुलकर अपना कार्य समाप्त करने के उपरान्त स्वयं करते हैं ।

 

खेलकूद एवं योग प्रशिक्षण को प्रभावी एवं कर्मचारियों की रूचि एवं उनकी प्रतिमा निवारने तथा मनोरंजन हेतु कारखाना खेलकूद समिति के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं । जिसके अन्तर्गत समय – समय पर अन्तर कारखाना एवं अखिल भारतीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को आयोजित किया जाता है । वर्तमान परिवेश में रेल यातायात को सुगम , उत्कृष्ट सेवा , आधुनिक तकनीक से युक्त तीव्रगामी , न्यूनतम अनुरक्षण वाले एयर ब्रेक पद्धति के मालवाहनों के अलावा अन्य भारत सरकार के उपक्रम जैसे भी संतुष्टि पूर्ण रूप से कर रहा है । बी.एच.ई.एल. ( भेल ) भारतीय सेना के मालवाहनों आदि का मरम्मत का कार्य भी झाँसी कारखाना गुणवत्ता एवं 01 अप्रैल 2003 से यह प्रतिष्ठित कारखाना मध्य रेल से विलग नये जोन उत्तर मध्य रेल के अन्तर्गत स्थानान्तरित कर दिया गया, जिसका मुख्यालय इलाहाबाद(तब) में स्थापित किया गया । कारखाना झॉसी मालवाहन मरम्मत के लिए भारतीय रेल एवं एशिया महाद्वीप में सबसे बड़ा कारखाना है । प्रायः स्मरणीय महारानी लक्ष्मीबाई की शौर्य स्थली झॉसी जिस प्रकार विश्व में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है , उसी प्रकार झॉसी कारखाना का भारतीय रेल में अपना अलग अस्तित्व एवं महत्व रखता है |

 

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