*सरकार के मुलाजिम ही उड़ा रहे उच्च न्यायालय एवं प्रदेश सरकार के आदेशों की धज्जियां क्या मिल पाएगा अजय पत्रकार को न्याय*
रिपोर्ट कृष्ण कुमार
जनपद चित्रकूट के थाना बरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत मनका में पत्रकार अजय शुक्ला को दबंग सत्यनारायण द्वारा 17/06/2021 को गाली गलौज व जान से मारने की धमकी दी गयी थी जिसके सम्बन्ध में पत्रकार द्वारा बरगढ़ थाने में लिखित शिकायती प्रार्थना पत्र भी दिया गया था लेकिन करीब 24 दिन बीत जाने के बाद भी पत्रकार को नहीं मिला न्याय इस सम्बन्ध में जब कई पत्रकार साथियों ने संबधित अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही तो अधिकारियों द्वारा बताया गया कि आरोपी नाबालिग है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी नाबालिग नहीं बल्कि बालिग है पुलिस आरोपी को बचाने में मदद कर रही है। वहीं आरोपी सत्यनारायण पुलिस से मिलकर अजय पत्रकार के विरुद्ध झूठा मुकदमा लिखाने के फिराक में हैं। जबकि घटना से पहले आरोपी के पिता चंद्रिका प्रसाद से व उसके परिवार से अजय शुक्ला पत्रकार का उठना बैठना व ताल मेल था जबकि रामनुग्रह से अजय शुक्ला पत्रकार के पिता से 2008 से मुकदमेवाजी व 23/06/2009 मारपीट का मुक़दमा दर्ज हुआ था तब से रामनुग्रह से अजय शुक्ला के परिवार के बीच कोई बोल चाल उठना बैठना खान दान कुछ भी नही है लेकिन बरगढ़ पुलिस द्वारा सही तथ्यों की जांच न करके आरोपी को बचाने का काम कर रही है आज तक पुलिस द्वारा ये जांच नही की गई कि क्या अजय शुक्ला व रामनुग्रह शुक्ला के बीच मेल जोल है या नही है पहले बरगढ़ पुलिस द्वारा ये कहा गया कि आरोपी नाबालिक है लेकिन जब कुछ साछ्य सामने आए तो अब बरगढ़ पुलिस द्वारा मैटर को मोड़ दिया गया और ये कहा गया कि अजय पत्रकार रामनुग्रह का चचेरा भाई है लेकिन यह सत्य है कि चचेरा भाई है परंतु सन 2008 से अभी तक अजय पत्रकार व रामनुग्रह का कोई ताल मेल उठना बैठना व खान दान नही है पर झूठा आरोप लगाते हुए कहा कि अजय पत्रकार क्रास मुक़दामा के चक्कर मे हैं। लेकिन बड़ा विषय यह है कि पहले पत्रकार को गाली गलौज व जान से मारने की धमकी दी जाती है फिर आरोपी के परिवार द्वारा गलत बयान बाजी की जाती है सबसे बड़ा सवाल यह है कि पत्रकारों को लेकर कोर्ट व सरकार द्वारा बार बार कहा जाता है कि पत्रकार को धमकाने वाला 24 घंटे के अंदर होगा सलाखों के पीछे व 50000 का जुर्माना एवं तीन साल की कैद क्या यह सही है अगर सही है तो अभी तक आरोपी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत क्यों नहीं किया गया। आज भी अजय पत्रकार को है जान माल का खतरा आखिरकार क्यों नही किया जा रहा सरकार के आदेशों का पालन क्यों उड़ाई जा रही हैं मान्यनीय उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या मिल पायेगा अजय पत्रकार को न्याय या फिर बना रहेगा जान माल का खतरा।