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हिन्दी के प्रति संकीर्ण नजरिए को बदलने का काम प्रत्येक भारतीय का-प्रतीक

हिन्दी के प्रति संकीर्ण नजरिए को बदलने का काम प्रत्येक भारतीय का-प्रतीक

हिन्दी के प्रति संकीर्ण नजरिए को बदलने का काम प्रत्येक भारतीय का है। यह बात बुन्देलखण्ड विश्व विद्यालय झांसी के छात्र/युवा छात्र नेता प्रतीक द्विवेदी ने कही।
बुन्देलखण्ड विश्व विद्यालय झांसी के छात्र/युवा छात्र नेता प्रतीक द्विवेदी ने अपने आवास कोंच पर हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर बोलते हुए कहा कि प्रेमचंद्र जी कहते हैं जो इस स्थान नारी के माथे पर बिन्दी का है वही स्थान भाषाओं में हिंदी का है। उन्होंने कहा कि किसी देश की पहचान उसकी भाषा एवं संस्कृति से होती है। 200 वर्ष की गुलामी के बाद यह निर्णय लिया गया कि जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक अगर बेहतर संवाद स्थापित करना है तो मात्र हिन्दी भाषा से ही किया जा सकता है। हिन्दी भाषा में बहुत ताकत है जिसने स्वामी विवेकानंद को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। आज हिन्दी के लिए संकीर्ण नजरिए को बदलने के लिए हमें लोगों को जागरूक करना होगा। प्रतीक द्विवेदी ने कहा कि भाषाएं एवं माताएं अपने पुत्र से ही नाम पाती हैं। ऐसे में हिन्दी पुत्र होने के नाते हमारा यह दायित्व कि हम अपनी राष्ट्रभाषा को प्रतिष्ठित करने की दिशा में अपना योगदान दें।

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