आबकारी विभाग की काली करतूत, हम आबकारी विभाग से, जब चाहे पकड़े अवैध शराब, जब चाहे छोड़ दें, हम है मनमौजी
ग्रामीण एडीटर – धीरेन्द्र रायकवार
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे ठोक रही है। लेकिन यहां शासन के दावों की धज्जिया आबकारी विभाग उड़ाता नजर आ रहा है। आपको बता दें कि आबकारी विभाग द्वारा पहले तो पूरे जनपद में ओवररेटिंग और अवैध कारोबार आबकारी विभाग के संरक्षण में धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं।
मामला झांसी जनपद के तहसील मोठ के थाना पूॅछ क्षेत्र के ग्राम का कायला का है। जहां पर आबकारी विभाग ने बीती शाम ग्राम कायला से एक दंग व्यक्ति के मकान से अवैध शराब का जखीरा पकड़ा और फिर शुरू हुआ यहीं से सेटिंग गैटिंग का मामला काफी देर चला लेकिन मामला नहीं बना जिससे आरोपी और शराब को लेकर थाने आ गये जिससे भय के कारण मोटा माल बन बसूल सके। फिर सेटिंग गैटिंग चलने के बाद मामले को सल्टाने के लिए संबंधित विभाग से अवैध कारोबारियों की साॅठगाॅठ होने लगी। और मामला फिर वही से रफा दफा होने लगा और आरोपी महिला को वहीं से चलता कर दिया। शराब की खाली पेटी थाना परिसर में ही छोड़कर शराब लेकर चले गए।
वह इस पूरे मामले की जानकारी मीडिया कर्मियों को लगते ही मीडिया कर्मी भी सुबह जब थाने पहुंचे तो पता चला के थाने में कोई मामला ही दर्ज नहीं कराया गया। मीडिया ने जब उक्त संबंधित आबकारी विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। तो उन्होंने बताया कि महिला को छोड़ दिया गया है। और संबंधित आबकारी विभाग के गोदाम में सीजकर रख दिया गया है। अब एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि अवैध शराब में पकड़ी महिला कि कम से कम आबकारी अधिनियम दफा 69 के तहत कार्रवाई हुई होती। क्योंकि मामला थाना पूॅछ क्षेत्र का है। तो मामले के अनुसार उक्त पूरे मामले की तहकीकात या कार्रवाई संबंधित थाने द्वारा ही की जाती है। लेकिन यहां तो आबकारी विभाग जनपद में अवैध शराब के कारोबार कराने में व्यस्त है। जबकि जनपद के कई थाना क्षेत्रों में 45 रूपये में मिलने वाले क्वार्टर को 60 रूपये तक में बेचा जा रहा है। लेकिन आबकारी विभाग गहरी नींद में सोता नजर आ रहा है। आबकारी विभाग सिर्फ और सिर्फ क्षेत्र में घूमकर अवैध शराब पर कार्रवाई तो करता है। लेकिन सिर्फ खानापूर्ति के लिए या फिर यूं कहिए कि अपनी जेब गर्म करने के लिए अब देखना यह होगा कि इस मामले पर संबंधित उच्च अधिकारियों द्वारा इन आबकारी विभाग के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। या फिर यूं ही ठंडे बस्ते में मामले को डालकर धड़ल्ले से अवैध कारोबार में लिप्त रहेंगे।