पराली जलाने से पर्यावरण संकट, प्रशासन सख़्त
जालौन:० खेती-किसानी के इस मौसम में जालौन की हवा एक बार फिर धुएँ से भरने लगी है। खेतों में पराली जलाए जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, जबकि प्रशासन की ओर से इसके लिए कड़े दिशा-निर्देश और रोक पहले से ही लागू हैं।
खेतों में धू-धू कर जली पराली — आदेशों की उड़ रही जमकर धज्जियाँ
अलग-अलग क्षेत्रों से किसानों द्वारा पराली जलाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
इसी कड़ी में कोंच कोतवाली क्षेत्र के महेशपुरा रोड से पराली जलाने की घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
प्रशासन हरकत में — मौके पर जांच, किसान पर कार्रवाई शुरू
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया।
कोंच तहसील क्षेत्र के गाँव असुपुरा में रहने वाले किसान जसवंत सिंह पुत्र जितवार सिंह ने अपनी 0.405 हेक्टेयर भूमि में 15 नवंबर की रात लगभग 9 बजे पराली में आग लगाई थी।
घटना की पुष्टि के लिए लेखपाल और कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुँची।
जांच उपरांत किसान को नोटिस जारी किया गया है।
निर्धारित नियमों के तहत जुर्माना और अन्य कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
पर्यावरण को भारी नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से —
वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिरती है।
ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि होती है।
मिट्टी की उर्वरता कम होती है।
जीव जन्तु,पशु-पक्षियों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
किसानों के हित में प्रशासन की विन्रम अपील
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि —
पराली जलाने से बचें
उपलब्ध वैकल्पिक मशीनों व सरकारी योजनाओं का उपयोग करें।
किसान पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें।
खेतों की मिट्टी को सुरक्षित रखने के लिए पराली का सही निष्पादन अपनाएँ।
जनहित में संदेश
पराली जलाना सिर्फ एक खेत का नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य का सवाल है।
किसान भाई यदि जागरूक हों, तो हवा भी बचेगी और खेती का भविष्य भी मजबूत होगा।
रविकांत द्विवेदी RK