मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है को मानते हुए बेसहारा, मंदबुद्धि, बेघर लोगों की सेवा करने के लिए अपने साथ ले गए आश्रम प्रतिनिधि, परिजनों से मिलवाने का भी करते है प्रयास
नवबर्ष पर झांसी के चौराहों और सड़कों पर घूम रहे बेसहारा, मंदबुद्धि, बेघर लोगों को तलाश कर अपने साथ ले जाने के लिए प्रयासरत और मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा मानने वाले समाजसेवियों को देख कर हर कोई अचंभित था जिन असहाय लोगों को कोई छूना भी पसंद नहीं करता उन्हें बड़े प्यार और स्नेह से वह अपने साथ अपने आश्रम ले जा रहे थे वहीं उन्हें पानी और नाश्ता भी दे रहे थे आश्रम में इन बेसहारा लोगों की पूरी देखभाल के साथ उनके परिजनों से मिलाने का प्रयास भी किया जाता है जहां कुछ परिजन अपना से मिलकर खुशी व्यक्त करते है वहीं कुछ परिजन नाराज़ होते हुए अपनों को ही स्वीकारने से इनकार कर देते है जिन्हें आश्रम अपने साथ आजीवन रखता है इन बेसहारा और असहाय लोगों को आश्रम के प्रतिनिधि पुलिस को सूचित करते हुए अपने साथ ले जाते है आश्रम के प्रतिनिधियों के द्वारा यह पुण्य कार्य करते देख लोग अचंभे में पड भावुक भी हो गए