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स्वास्थ्य के नाम पर सरकार के करोंडों बहे, फिर भी हालात जस के तस, चिकित्सकों की मनमानी से प्राइवेट अस्पतालों की चांदी:रिपोर्ट-धीरेन्द्र रायकवार

ग्रामीण एडिटर ब्यूरो धीरेन्द्र रायकवार

मोंठ/झाँसी – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक की मनमानी के चलते चिरगांव स्वास्थ्य केंद्र राम भरोसे चल रहा है। ङाक्टर न होने पर फार्मासिस्ट व वार्ङ बाॅय द्वारा मरीजो का इलाज चिरगांव स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। चिरगाँव स्वास्थ्य केन्द्र की हालत बदबसे बसतर
होती जा रही हैं। मरीजो को स्वास्थ्य केन्द्र मे सुविधाओ के नाम पर कुछ ही दवाऐ दी जाती है। अगर मरीज ङाक्टर की मांग करता है, तो उपचार भी नही किया जाता। इमर्जेंसी मे अगर कोई मरीज आता है, तो ङाक्टर न होने के कारण छोटी छोटी बिमारी मै भी झाँसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। रविवार के दिन तो किसी भी स्टाफ मिलना स्वास्थ्य केंद्र मे न मुमकिन हो जाता है। मरीज अगर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचता है तो नर्स व बार्ङ बाॅय यह कहकर मरीज को बापस भेज देते कि आज छुट्टी है। हम मरीज नही देखते क्या प्रदेश सरकार द्वारा इनको फ्री की बेतन पाने वाले ङाक्टर व स्टाफ के खिलाफ कोई कार्यवाही नही होती इसी के चलते वर्तमान मे प्राईवेट अस्पताल भरे हुए है। गरीब मरीज अपना इलाज प्राईवेट अस्पतालो मे कराने को मजबूर है। प्रदेश सरकार ने गरीब मरीजो के लिए करोड़ो खर्च करके स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया लेकिन ङाक्टरो की कमी व लापरवाही के चलते गरीब मरीजो को स्वास्थ्य केन्द्र की किसी भी सुविधा का को लाभ नही मिल पा रहा सीoएमo ओo साहब इस ओर ध्यान केंद्रित करे।

 

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