*सामूहिक प्रयास व जनभागीदारी से लिंगानुपात के अंतर को कम किया जा सकता है– डॉ सुधाकर पांडेय*
*राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर रैली एवं लिंग संवेदीकरण कार्यशाला का हुआ आयोजन*
*बेटों को महिलाओं का सम्मान करने की सीख दें अभिभावक — डॉ यू एन सिंह*
*बेटियों को समान अवसर व बेटों को संवेदनापूर्ण संस्कार दिए जाएं –आनन्द चौबे*
*दहेज की मांग, पुत्र की चाह व बेटियों की सुरक्षा लैंगिक असमानता हेतु है जिम्मेदार — डॉ नीति शास्त्री*
झांसी : जनपद झांसी में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी झांसी डॉ सुधाकर पांडेय के नेतृत्व में जन-जागरूकता रैली के माध्यम से महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक असमानता के विषय पर समाज को जागरूक किया गया।
रैली का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किया। यह रैली मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से प्रारंभ होकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय चौराहा होते हुए आंतिया तालाब से वापस सीएमओ कार्यालय में समाप्त हुई। रैली में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुधाकर पांडेय,एसीएमओ डॉ के एन एम त्रिपाठी, डॉ एन के जैन, कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ महेंद्र कुमार, डॉ रमाकांत स्वर्णकार, डॉ उत्सव राज, जिला मलेरिया अधिकारी आर के गुप्ता, डॉ सतीश चंद्र,डॉ विजयश्री शुक्ला, डॉ अनुराधा राजपूत एवं कार्यालय के समस्त अधिकारी तथा कर्मचारियों के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, विपिन बिहारी महाविद्यालय, विद्यावती नर्सिंग कॉलेज एवं राघवेंद्र नर्सिंग कॉलेज की छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।
रैली के समापन के पश्चात कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में लिंग संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ यू एन सिंह जिला क्षयरोग अधिकारी द्वारा की गई। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉक्टर यू एन सिंह ने कहा कि झांसी का लिंगानुपात 1000 पुरुषों के सापेक्ष 946 एवं बाल लिंगानुपात जीरो से 6 वर्ष के बच्चों के बीच 1000 बालक के सापेक्ष 927 बालिकाएं हैं। सामाजिक संस्थाओं, समाजसेवियों तथा सरकारी विभागों के सामूहिक प्रयास व जनभागीदारी से लिंगानुपात के अंतर को कम किया जा सकता है। बेटों को महिलाओं का सम्मान करने की सीख प्रत्येक अभिभावक को देनी चाहिए जिससे बचपन से ही स्त्री शक्ति के प्रति आदर भाव उत्पन्न किया जा सके।
नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी डॉ महेंद्र कुमार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि महिला सशक्तिकरण एवं समाज से बेटा-बेटी के भेद को दूर करने का सबसे अच्छा हथियार है– शिक्षा। शिक्षा के माध्यम से तार्किकतापूर्ण ढंग से लोगों के विचारों को परिवर्तित किया जा सकता है। शिक्षित व्यक्ति समाज की प्रगति हेतु सामूहिक प्रयास करता है तथा जन सरोकार के मुद्दों पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। शिक्षा द्वारा लैंगिक असमानता को कम किया जा सकता है।
कार्यशाला में आनंद चौबे मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक ने कहा कि समाज में बेटे व बेटी के भेदभाव को दूर करने के लिए जेंडर आधारित असमानता के विषय में लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। पुरुषों को महिलाओं के प्रति संवेदनापूर्ण व समानता का व्यवहार करना चाहिए। सभी माता-पिता बेटियों को प्रगति के समान अवसर दे एवं बेटों को संवेदनशील संस्कार दिए जाएं। माता-पिता द्वारा बेटों को संस्कारित करने की अधिक आवश्यकता है।
राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ समाजसेविका डॉ नीति शास्त्री ने कहा कि समाज में दहेज की मांग, वंश वृद्धि हेतु पुत्र की चाह, बेटियों की असुरक्षा आदि कारण लैंगिक असमानता हेतु जिम्मेदार हैं। विवाह के आयोजन में दिखावापूर्ण संस्कृति एवं कुल का दीपक पुत्र को पैदा करने हेतु सामाजिक दबाव के कारण बालिकाओं के साथ भेदभाव किया जाता है एवं बचपन से ही बेटे-बेटियों में ऐसी संस्कार दिए जाते हैं जो कि जेंडर आधारित असमानता को बढ़ाते हैं।
कार्यशाला में प्रगति रथ संस्था से डॉ संध्या सिंह चौहान, नव प्रभात संस्था से श्रीमती रूपम अग्रवाल एवं अर्चना अग्रवाल, समाजसेवी श्रीमती देवप्रिया उकसा, जीआईसी इंटर कॉलेज से श्रीमती अनीता तिवारी आदि ने भी महिला सशक्तिकरण व राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ विजय शुक्ला द्वारा किया गया।
कार्यशाला में नोडल अधिकारी डॉ महेंद्र कुमार, डॉ रमाकांत स्वर्णकार, डॉ अंशुमान तिवारी, डॉ सतीश चंद्र, डॉ नीति शास्त्री, आरके गुप्ता, डॉ विजय शुक्ला, डॉ अनुराधा, डॉ मधुसूदन गुप्ता, डॉ देव प्रिया उकसा जीआईसी से श्रीमती अनीता कुमारी, डॉ संध्या सिंह चौहान,, श्रीमती रूपम अग्रवाल, श्रीमती अर्चना अग्रवाल, डॉ प्रीति तिवारी, विक्रम सिंह पूनिया, बृजकिशोर आदि उपस्थित रहे।