• Thu. Feb 26th, 2026

Jhansi Darshan

No 1 Web Portal in jhansi

मनुष्य के पापों का नाश करतीं हैं महागौरी माई-शुभम कृष्ण शास्त्री

मनुष्य के पापों का नाश करतीं हैं महागौरी माई-शुभम कृष्ण शास्त्री

चैत्र नवरात्रि में आज का दिन अष्टमी का है। आज का दिन महागौरी मैया का होता है। आज के दिन देवी मैया की भक्तिभाव के साथ पूजा अर्चना करने से मनुष्य के इस जन्म के पाप के साथ पूर्व जन्म के पापों का भी नाश हो जाता है व महागौरी मैया अपने भक्तों सुख, सम्पत्ति व शान्ति प्रदान करती हैं। यह बात भागवताचार्य शुभम कृष्ण शास्त्री ने कही।
भागवताचार्य शुभम कृष्ण शास्त्री ने अष्टमी पर माँ महागौरी मैया के महिमा के बारे में बताते हुए कहा कि आज के दिन का बड़ा महत्व होता है। आज के दिन देवी मैया के भक्तों को मां दुर्गा के आठवें स्वरुप महागौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब महागौरी की उत्पत्ति हुई उस समय उनकी उम्र आठ साल थी इसलिए इनकी पूजा अष्टमी के दिन की जाती है। महागौरी देवी मैया सदा सुख और शान्ति देती है, साथ ही इस जन्म के पापों के साथ पिछले जन्म के पापों का भी नाश मैया करती है। माता महागौरी के मंत्र व हवन के माध्यम से उनसे सुख समृद्धि, मान-सम्मान व आरोग्य रहने का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। विधिपूर्वक मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है व कष्टों का भी निवारण होता है। उन्होंने मैया की महिमा के बारे में बताते हुए कहा कि महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं। शुभम कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मैया का रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि महागौरी को शिवा भी कहा जाता है। इनके हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है तो दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है। अपने सांसारिक रूप में महागौरी उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी तथा श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू है तो तीसरा हाथ वरमुद्रा में हैं और चौथा हाथ एक गृहस्थ महिला की शक्ति को दर्शाता हुआ है। महागौरी को गायन और संगीत बहुत पसंद है। ये सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। इनके समस्त आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की उपासना से पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि आज का दिन माताओं बहिनों के लिये बहुत ही मंगलकारी व मनोकामनापूर्ण करने वाला होता है। इस दिन विवाहित स्त्रियों को हमेशा सुहागन रहने का आशीर्वाद माँ महागौरी से मिलता हैं इसलिये सभी सुहागिन महिलाएं महागौरी को चुनरी अवश्य चढ़ाएं। उन्होंने बताया कि जिन कन्याओं का विवाह नही हुआ हैं उनके विवाह के योग भी मैया की कृपा से बनते हैं और उनके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। भागवताचार्य शुभम कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप भी है इसलिए माँ के भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि देवी महागौरी की पूजा भी नवरात्रि के अन्य दिनों की ही तरह करें। सुबह स्नान आदि करके देवी मां का ध्यान करें. उन्हें फूल चढ़ाएं, मां के समक्ष दीप जलाएं. मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें क्योंकि मां को सफेद रंग पसंद है। इसके बाद मां को रोली कुमकुम, फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें। मां की आरती करें और मंत्रों का भी जाप करें। सामर्थ्य अनुसार नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें। शुभम कृष्ण शास्त्री ने बताया माता के भोग में महागौरी को नारियल का भोग अवश्य लगाएं। भोग लगाने के बाद उसी नारियल को प्रसाद के रूप में सभी को बांटे।

Jhansidarshan.in