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सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना किसान नेताओं का अड़ीयल रवैया एक और प्रमाण अशोक सिंह राजपूत रिपोर्ट दया शंकर साहू नरेंद्र सविता

सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना किसान नेताओं का अड़ीयल रवैया एक और प्रमाण अशोक सिंह राजपूत रिपोर्ट दया शंकर साहू नरेंद्र सविता

 

ग्रामीण एडिटर कृष्ण कुमार

 

झांसी के कस्बा पूंछ मैं क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा अशोक राजपूत ने पूंछ में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि सुप्रीम कोर्ट की पहल की अवहेलना किसान नेताओं के अड़ियल रवैया का एक और प्रमाण है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने किसी कानूनों के अमल पर रोक लगाने का फैसला किसान नेताओं को आश्वस्त करने के लिए ही किया है क्षेत्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट करते हुए कहा कि लगातार 47 दिन से चल रहे किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नए कानूनों को अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए चार सदस्य कृषि विशेषज्ञों की कमेटी बना दी है जिससे कमेटी में किसान अपनी बात रख सके लेकिन किसानों ने समिति के समक्ष अपनी बात रखने के बजाय उस कमेटी को ही सरकार समर्थक बता दिया।
क्षेत्रीय अध्यक्ष किसान मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा संसद में पारित कृषि कानून को अमल में रुकना संविधान लोकतंत्र और कानून की अवहेलना है क्योंकि कोर्ट ने जो भी निर्णय दिया है भारत सरकार पहले से ऐसे निर्णय को लागू करने में प्रयासरत रही है पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में किसान नेता ने कहा कि आंदोलनकारियों को ना तो सरकार की वार्ता की पहल स्वीकार है और ना ही अदालत का फैसला किसान नेताओं के रवैया से यह साफ है कि किसानों की समस्याओं का हल चाहने के बजाय अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करना चाहते हैं अशोक राजपूत ने आगे बताया कि आंदोलनकारियों की मांग हनुमान जी की पूछ की तरह लगातार बढ़ती जा रही है आंदोलनकारियों ने पहले कृषि बिल में संशोधन की मांग की फिर एमएसपी के लिए कानून बनाने बाद में तीनों कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग रखी है इससे प्रतीत होता है कि कानून अब संसद में नहीं बल्कि सड़कों पर बनना चाहिए और अब कोई भी संगठन दस बीस हजार लोगों को लाकर सड़क जाम कर और बंधक बनाकर कानून को रुकवा सकता है पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से मंडल अध्यक्ष राजेश सिंह सेंगर जिला महामंत्री किसान मोर्चा देवेंद्र सिंह कंसाना जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा रिंकू उपाध्याय प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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