ग्रामीण एडिटर धीरेन्द्र रायकवार
प्रसव के लिये आई गर्भवती महिला से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में सुविधा शुल्क वसूला गया। प्रसव के दौरान बच्चा बीमार होने पर बाहर के लिये रेफर कर दिया गया। जब परिजनों ने स्टाफ नर्स द्वारा लिया गया सुविधा शुल्क वापस मांगा तो साफ मना कर दिया गया। गरीबी से जूझ रहा परिवार पैसे न होने पर बीमार बच्चे को लेकर मायूसी की हालत में अस्पताल गेट पर बैठा रहा किन्तु उस पर किसी को भी रहम नहीं आया।
हमीरपुर के कैथी गांव निवासी डिल्लीपत अहिरवार की पत्नी उमा को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार सुबह उसे नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। डिल्लीपत ने बताया कि स्टाफ नर्स ने कहा कि नार्मल डिलीवरी होगी जिसके एवज में उसे 11 सौ रूपये सुविधा शुल्क देना होगा। बताया कि वह मात्र एक हजार रूपये लेकर घर से चला था जबकि नर्स की मांग 11 सौ रूपये की थी। उसने गरीबी का हवाला देते हुए खूब हाथपैर जोडे़ किन्तु स्टाफ नर्स का दिल नहीं पसीजा। आरोप लगाया कि स्टाफ नर्स ने उससे 6 सौ रूपये सुविधा शुल्क के वसूल लिये। दोपहर करीब 12.45 बजे उमा का प्रसव हुआ। प्रसव के कुछ ही देर बाद नवजात शिशु की हालत बिगड़ने लगी। यह देख स्टाफ् नर्स ने रेफर पर्चा थमाते हुए शिशु को बाहर ले जाने का फरमान सुना दिया। बाहर जाने की बात सुनते ही डिल्लीपत के पैरों तले से जमीन खिसक गई। किसी तरह वह घर से मात्र एक हजार रूपये की व्यवस्था कर अस्पताल आया था जिसमें से छह सो रूपये नर्स को दे दिये थे। अब बाहर जाने के लिये उसके पास पैसों की व्यवस्था ही नहीं थी। जब उसने बाहर जाने के लिये रूपये न होने की बात करते हुए सुविधा शुल्क में दिये गये रूपये वापस मांगे तो स्टाफ नर्स ने रूपये देने से साफ इनकार कर दिया। रूपये न होने पर निजी गाड़ी कर झांसी नहीं जा सकते थे। जिस पर प्रसूता नवजात शिशु को लिये अस्पताल गेट पर बैठी एम्बुलेंस का इंताजार करती रही। शाम के वक्त जब ऐंबुलेंस आई तब वह नवजात को लेकर उपचार के लिये झांसी रवाना हुई। रिपोर्ट नेहा वर्मा