राठ/हमीरपुर –निजी करण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आवाहन पर सोमवार को विद्युत विभाग के कर्मचारी कार्यबहिस्कार पर रहे। इस दौरान कर्मचारियांे ने धरना देते हुए निजीकरण के विरोध में जमकर नारेबाजी की। चेतावनी दी यदि निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो कर्मचारी आरपार की लड़ाई को मजबूर होंगे। सोमवार को विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने आधे दिन का कार्य बहिस्कार किया। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने अपने सम्बोधन में बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 16 मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में पांच शहरों की विद्युत वितरण व्यवस्था को निजी हाथांे में सौपने का निर्णय लिया है। इन शहरों में लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ व मुरादाबाद शामिल हैं। इससे पूर्व एकीक्रत सेवा क्रय दाता के नाम पर सात जनपदों रायबरेली, मऊ, बलिया, उरई, इटावा, कन्नौज एवं सहारनपुरा की विद्युत आपूर्ति के निजीकरण के टेंडर प्रकाशित किये गये। जिसके विरोध में संघर्ष समिति द्वारा मुख्यमन्त्री, पावर कार्पाेरेशन के अध्यक्ष व सचिव उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिख कर विरोध जताया था। विरोध के बावजूद कोई असर न होने पर संघर्ष समिति ने एक पाली के कार्य बहिस्कार व धरने का निर्णय लिया। कहा कि जिन पांच जिलों के निजीकरण सरकार द्वारा किया गया है उन जिलों की विद्युत आपूर्ति का दायित्व विद्युत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा समिति को दिया जाये तो वह एक वर्ष में ही वांछित सुधार कर दिखाने में सक्षम है। चेतावनी दी कि नीजीकरण के जनविरोधी कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया जायेगा। इस अवसर पर सौरभ शाक्य, राजू प्रसाद, नशीम अहमद, आशीष सक्सेना, उमेश कुमार, फैजुल, बिनीत बाबू, जाफिर खान, मुकेश, घनश्याम, रमेश कुमार, रमेश माली, खेमचन्द्र, नरेश आर्य, अरूण सिंह, रामप्रकाश, सुनील, पंकज शर्मा आदि मौजूद रहे।