• Fri. Feb 27th, 2026

Jhansi Darshan

No 1 Web Portal in jhansi

माता कात्यायनी की विधि विधान से पूजा अर्चना से होंगे कई लाभ-विष्णुकान्त शास्त्री

माता कात्यायनी की विधि विधान से पूजा अर्चना से होंगे कई लाभ-विष्णुकान्त शास्त्री

चैत्र नवरात्रि की षष्ठी तिथि यानी छठवां दिन माता कात्यायनी का होता है। माता की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने पर भय का पूरी तरह से नाश हो जाता है। यह बात कोंच नगर के प्रकाण्ड विद्वान/भागवताचार्य पण्डित विष्णुकान्त मिश्र शास्त्री ने कही।
पण्डित विष्णुकान्त मिश्र शास्त्री ने बताया कि माँ कात्यायनी पार्वती शक्ति के नौ रूपों में छठवीं रूप है। आज के दिन माँ कात्यायनी की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने से और सच्चे मन से याद करने से माता भय के साथ साथ उसके रोग, शोक, संताप आदि भी नष्ट कर देती है। नवरात्रि के षष्ठी तिथि पर आदिशक्ति दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करने का विधान है। महर्षि कात्यायनी की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। माता कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जाग्रृति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती हैं। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं। पण्डित विष्णुकान्त मिश्र शास्त्री ने माता के भोग के बारे में बताते हुए कहा कि नवरात्र की षष्ठी तिथि यानी छठे दिन माता दुर्गा को शहद का भोग लगाएं । इससे धन लाभ होने के योग बनेगें। उन्होंने बताया कि माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। अंत में पण्डित विष्णुकान्त शास्त्री ने कहा कि चूंकि इस समय कोरोना वायरस ने बुरी तरह से पैर पसार लिए है इसलिए जग कल्याण के लिए सभी देवी भक्त मैया से इस वायरस को समाप्त करने की प्रार्थना करें, साथ ही सोशल डिस्टेंसिग व मास्क अवश्य लगाएं व सरकार द्वारा लागू किये किये गए शनिवार से रात 8 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक कोरोना कर्फ्यू 35 घण्टे का पालन भी करें।

Jhansidarshan.in