जालौन मंडी में किसानों की रात—आसमान तले गुज़री उम्मीदों की डगर
जालौन जनपद के किसानों की मजबूरी और उनकी पीड़ा एक बार फिर मंडी के हालातों से झलक रही है। जहाँ धान बेचने आए सैकड़ों किसान रातभर अपने ट्रैक्टरों के साथ खुले आसमान के नीचे खड़े रहे — लेकिन फसल की कीमत और सरकारी व्यवस्था दोनों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
जालौन की मंडी में सरदार पटेल चौराहे से लेकर बंगरा चौराहे तक बस ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे हैं। किसान अपनी मेहनत की कमाई — यानी धान की फसल लेकर मंडी में तो पहुँच गए, लेकिन खरीदी के इंतज़ाम नदारद हैं।
धान खरीद के लिए पूरे जिले में सिर्फ एक क्रय केंद्र बनाया गया है, जिससे किसानों को घंटों नहीं, बल्कि रातभर इंतज़ार करना पड़ रहा है।
किसानों की पीड़ा
किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा घोषित 3000 रुपये प्रति कुंतल के समर्थन मूल्य के बदले, उन्हें मंडी में सिर्फ 2500 रुपये तक का भाव मिल रहा है। ऐसे में उनके मेहनत और लागत का कोई मोल नहीं रह गया है।
फसल बेचने आए कई किसान मंडी में अपने ट्रैक्टरों के पास रातभर पहरा देते रहे। कुछ ने कहा — “नहीं बेचेंगे तो घर कैसे चलाएँगे, और बेचेंगे तो घाटे में जाएंगे…”
कहने को तो सरकार किसानों के हित में योजनाएँ चला रही है, लेकिन हकीकत यही है कि किसान आज भी अपनी मेहनत की फसल का सही दाम पाने के लिए सड़कों पर खड़ा है।