*पांच नदियों के संगम का समूचे विश्व में एकमात्र स्थान*
*जहां अब बनने जा रहा है करीब* *3 हजार करोड़ रुपए की लागत से पचनदा बैराज*
*खत्म होगी सूखे की समस्या*
*माधौगढ़ विधायक मूलचंद सिंह निरंजन की कोशिश लाई रंग*
*संभवतः नवंबर माह में सूवे के मुख्यमंत्री कर सकते हैं शिलान्यास*
जालौन में मौजूद पांच नदियों का संगम ‘पंचनद’ प्रकृति का अनूठा उपहार है। देश के कई राज्यों से होकर गुजरने वाली पांच नदियां यहां आकर मिलती है। पांच नदियों का संगम तो दुनिया में कहीं नहीं है। इसीलिए पचनद को महा-तीर्थराज के नाम से जाना जाता हैं। वहीं माधौगढ़ से मौजूदा विधायक के प्रयास से इस पौराणिक स्थल पर देश के राष्ट्रपति व योगी सरकार की सहमति के बाद, यहां 3 हजार करोड़ की लागत से बैराज बनाने की मंजूरी मिल गई है। देश की पांच नदियों के एक मात्र संगम स्थल पंचनद व माधौगढ़ की ऐतिहासिक संस्कृति को विश्वपटल पर लाने की कवायद शुरू हुई है। इसकी शुरुआत पंचनद में बनने जा रहे बैराज से होंगी। बैराज के निर्माण होने से सूखे बुंदेलखंड के साथ कई किसानों की प्यास बुझ जाएगी। मुख्य उद्देश्य न सिर्फ बुंदेलखंड बल्कि पूरे विश्व को यहां की संस्कृति से अवगत कराना है। पचनद दुनिया का इकलौता स्थान है। जहां पांच नदियों का संगम हैं और यहां से यमुना, चम्बल, सिंध, पहुज, क्वांरी नदी होकर बहती हैं। माधौगढ़ से मौजूदा विधायक मूलचंद सिंह निरंजन ने बताया कि शासन से अनुमति मिल गई हैं और जल्द यहां बैराज का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। बैराज का निर्माण होने से किसानों से यहां के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेगी।