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*फूड इंस्पेक्टर का ध्यान किधर है, कोंच में घटिया केक इधर है*

*फूड इंस्पेक्टर का ध्यान किधर है, कोंच में घटिया केक इधर है*

कभी आपने कहावत सुनी होगी दिया तले अंधेरा। ऐसा ही अंधेरा फूड इंस्पेक्टर कोंच को क्यों नहीं दिख रहा या फिर वह जान बूझकर देखना नहीं चाहते। यह चर्चा भी कोंच नगर के लोग खूब कर रहे हैं और उनकी बात भी जायज है। आखिर क्या कारण हैं क्यों नहीं भरा जाता है बर्थडे केक का सैम्पल क्योंकि इस घटिया केक को बिकवाने वाला सक्रिय सदस्य जो ठहरा।
दरसल आज के समय में कोंच नगर में कहीं भी बर्थडे केक या अन्य किसी तरह के कार्यक्रम के लिए केक तैयार नहीं होता लेकिन कोंच नगर की सीमा मारकंडेश्वर चौराहा पर एक बड़ी दुकान सहित नगर में एक दो दुकानें इन घटिया केकों को वेचने का काम करती हैं। यह सब केक उरई से मंगाया जाता है और जिस केक को दो चार दिन में बेचकर उसको हर हाल में खत्म हो जाना चाहिए उस केक को महीनों भर यह दुकानदार रखकर बेचते हैं। उरई में जहां से यह केक आता है वह तो साफ कह देते हैं कि यहां से ले जाओ और तत्काल ही बर्थडे मनाओ लेकिन मारकंडेश्वर से लेकर बाजार के एक दो दुकानदार अपनी कमाई का जरिया केक को बनाये हुए हैं और इकट्ठा उरई से केक मंगाकर महीनों ठंडे आइस बॉक्स आदि में रखकर बेचते रहते हैं। न इस डिब्बा पर केक बनने की तारीख होती है और न इस डिब्बे पर एक्सपायरी होती है और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करके कोंच में खूब केक बेचा जा रहा है। वहीं कई नागरिकों ने बताया कि कोंच में जो केक आता है वह बहुत ही घटिया आता है, जिसमें दुकानदार को ज्यादा मुनाफा हो इस तरह का केक तैयार करवाया जाता है। लोगों ने बताया कि कई बार उन्होंने कोंच के मारकंडेश्वर आदि जगह से केक मंगाया लेकिन जब केक काटा गया और उसके बाद खाया गया तो बहुत ही घटिया क्वालिटी का निकला और जब इन दुकानदारों से शिकायत करने जाओ तो यह लड़ने लगते हैं। कोंच के नागरिकों ने बताया कि अब वह सतर्क हो गए हैं और जब उन्हें केक चाहिए होता है तो वह एक दिन पहले उरई आर्डर केक का कर देते है और दूसरे दिन उन्हें ताजा केक मिल जाता है। नागरिकों ने कहा कि केक को लेकर लड़ने भिड़ने या अधिकारी से शिकायत करने में क्या फायदा क्योंकि जिस फूड अधिकारी को कार्यवाही करनी होती वह खुद इन लोगों के यहां घण्टों बैठते हैं जब अधिकारी ही उनके यहाँ हाजिरी देता हो तो शिकायत वह किससे करें, इससे अच्छा है कि उरई से केक मंगाओ ओर बर्थडे आदि मनाओ। नागरिकों में सवालिया लहजे में कहा कि क्या फूड इंस्पेक्टर को यह सब नहीं दिखाई देता। नागरिकों ने तो यहां तक कहा कि जब वह कोंच आते हैं और मारकंडेश्वर पर अपने सक्रिय कार्यकर्ता के यहां घण्टों बैठते हैं और उसीके समीप ही लगी केक की दुकान जिसमें महीनों से भरा हुआ केक बेचने के लिए रखा जता है आखिर उन्हें क्यों नहीं दिखती है, क्यों वह कार्यवाही नहीं करते। नागरिकों ने कहा कि इसे ही तो कहते हैं दिया तले अंधेरा तो कुछ नागरिकों ने कहा कि दिया तले अंधेरा नहीं बल्कि जान बूझकर किया जा रहा अंधेरा इसको कहते हैं। फिलहाल नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि वह स्वयं अपनी मौजूदगी में फूड इंस्पेक्टर के साथ मारकंडेश्वर चौराहा सहित नगर की एक दो अन्य दुकानों पर सैम्पलिंग की कार्यवाही करवाएं, जिससे जनता में एक अच्छा संदेश जाए। फिलहाल नगर में फूड इंस्पेक्टर के कार्यों की खूब चर्चा होती है वहीं सक्रिय कार्यकर्ता द्वारा फूड इंस्पेक्टर के किये जाने वाले बीबीआईपी स्वागत को लेकर भी नगर में अच्छी खासी चर्चा है।

*रविकांत द्विवेदी,जालौन-यूपी*

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