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*लाल-नीली-पीली-हरी मिठाई, बारिश में पकड़ा न दे आपको चारपाई, आखिर फूड- इंस्पेक्टर क्यों कतराते हैं ऐसी दुकानों के सैम्पलिंग करने में ?*

*लाल-नीली-पीली-हरी मिठाई, बारिश में पकड़ा न दे आपको चारपाई, आखिर फूड- इंस्पेक्टर क्यों कतराते हैं ऐसी दुकानों के सैम्पलिंग करने में ?*

कोंच में इन दिनों नगर की सीमा के प्रवेश द्वार के कुछ दूर बाद ही  मारकंडेश्वर पर मिठाई की दुकानों पर चमचमाती लाल, नीली, पीली, हरी, गुलाबी, मेहंदी, कॉफी न जाने कितने तरह की मिठाईयां कैमिकल युक्त रंग जो काफी हानिकारक होते हैं उन्हें मिलाकर बेचीं जा रही है। रंग की मात्रा इसलिये ज्यादा डाली जाती है ताकि मिठाई में चमचमाता रंग देखकर लोग मिठाई खरीदें और मिठाई भी काफी दिनों तक चले और बरसात के मौसम में उसकी चमक फीकी न दिखे।
कोंच में मारकंडेश्वर पर आजकल खूब रंग-बिरंगी मिठाई बेचे जाने का खेल चालू है और तो ओर यहां पर एक दुकान जो बेचती है सड़े गले पकबान पर यहां पर आने वाले फूड इंस्पेक्टर की नजर नहीं पड़ती। जिस कारण लोग खूब अचम्भा मानते हैं। पुख्ता खबर के मुताबिक दरसल यहां पर लाल-नीली-पीली-हरी मिठाई  व सड़े गले बनने वाले पकबान एक दुकान पर बिकते हैं लेकिन यहां पर फूड इंस्पेक्टर की मेहरवानी से कभी भी सैम्पिल नहीं लिया जाता। दरसल इस दुकान के बारे में सभी जानते हैं जब फूड इंस्पेक्टर यहां आते हैं तो जमकर खातिरदारी उनकी इस दुकान पर होती है और इसी दुकान को चलाने वाला एक सदस्य जो सदस्य कम सक्रिय सदस्य ज्यादा है, खूब चारों तरफ से सभी दुकानदारों की खैर खबर सुनाता है और कब किसका माल कहाँ उतर रहा है उसकी सूचना भी प्रदान कर देता है। जिसके बाद यहां छोटे व्यापारियों का उत्पीडन शुरू हो जाता है ओर होती है सक्रिय सदस्य के कहने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही। वहीं नगर के तमाम दुकानदार जो बेचते हैं अच्छा साफ सुथरा सामान वह नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि आखिर मारकंडेश्वर पर इस दुकान का सैपम्ल क्यों नहीं लिया जाता, जबकि इस दुकान की चीजें क्या सेफ होंगी जब पीने तक का पानी तक तो सेफ नहीं है। दरसल यहां जो पानी की टंकी है वह छत पर रखी है और उसका पानी भी महीनों में साफ किया जाता है और यही पानी ग्राहकों को पिलाया जाता है व बनने वाली सामग्री में मिलाया जाता है। नागरिकों व दुकानदारों ने जनप्रिय/न्यायप्रिय/लोकप्रिय/ईमानदार जिलाधिकारी जालौन से मांग की है कि चूंकि उन्हें व्यापार करना है और वह खुलकर नहीं आ सकते अगर खुलकर आ गए तो उनका व्यापार फूड इंस्पेक्टर तबाह कर देंगे, इसलिये कोई टीम बनाकर गोपनीय तरीक़े से जांच करा लें तो फूड इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली का पता लग जायेगा।

रविकांत द्विवेदी,जालौन-यूपी

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