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मण्डल के अन्तर्गत जनपदों में निराश्रित एवं बेसहारा संरक्षित गोवां के भरण-पोण हेतु भूसे की समुचित उपलब्धता..

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May 12, 2021

मण्डल के अन्तर्गत जनपदों में निराश्रित एवं बेसहारा संरक्षित गोवां के भरण-पोण हेतु भूसे की समुचित उपलब्धता

झाँसी l मण्डल के अन्तर्गत जनपदों में निराश्रित एवं बेसहारा संरक्षित गोवंश को संरक्षित किये जाने के उद्देय से जनपद झांसी में 250 गौ आश्रय स्थल संचालित है, जिसमें 27590 गोवंश, जनपद जालौन में 408 गौ आश्रय स्थल संचालित है, जिसमें 20507 गौवंश तथा जनपद ललितपुर के में 38 गौ-आश्रय स्थल संचालित है, जिसमें 21501गौवंश का संरक्षण किया जा रहा है। मण्डल में कुल 696 गोआश्रय स्थलों की स्थापना एवं संचालन का कार्य करते हुये 69598 गौवंश का संरक्षित किया जा चुका है। मुख्य मन्त्री जी की सहभागिता योजनान्तर्गत इच्छुक गोपालको को झांसी में 1348, जालौन में 1520 एवं ललितपुर में 4850 अर्थात मण्डल में कुल 7718 गौवंश सुपुर्द किये जा चुके है। आश्रय स्थलों पर संरक्षित गोवां को समुचित सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके भरण-पोण हेतु स्थानीय स्तर पर भूसें की व्यवस्था ससमय करना एक प्राथमिकता है, जिससे गौवंश को समय पर भोजन उपलब्ध हो सके तथा उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। शासन के निर्देशानुसार मण्डल के जनपदों में झांसी में 188, जालौन में 171, ललितपुर में 38 अर्थात मण्डल में कुल- 397 भूसा बैंक की स्थापना की गई है। भूसा बैंक की स्थापना के समय विशेष ध्यान रखा गया है कि आगामी र्वा ऋतु के समय पानी से भूसा किसी की दा में खराब न हो, इसके साथ ही साथ प्रत्येक गोआश्रय स्थल पर प्रतिदिन भूसे की आवयकता के अनुसार निर्गत करने एवं उनके अभिलेखीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनपद झांसी में 54840 कुन्तल, जालौन में 7842 कुन्तल एवं ललितपुर में 8350 कुन्तल अर्थात मण्डल में कुल स्थापित 397 भूसा बैंक में 71032 कुन्तल भूसे का भण्डारण किया गया है। जिसमें 12 कुन्तल भूसा दान दाताओं द्वारा उपलब्ध कराया गया भी सम्मिलित है, राज्य सरकार से प्राप्त होने वाली गोवां के भरण-पोषण की धनराशि से क्रय किया गया है। भूसा क्रय एवं भण्डारण का कार्य क्रमित है। वर्तमान में मण्डल के अन्तर्गत जनपदों में गोवंश के भरण-भोण हेतु पर्याप्त मात्रा में भूसे की उपलब्धता है तथा स्थानीय स्तर पर हरे चारें की उपलब्धता हेतु भी कार्य किये गये है। वर्तमान में गौवंश के संरक्षण हेतु किसी प्रकार की कठिनाई नही है। यह भी अवगत कराना है कि विभाग के समस्त चिकित्साविद् निरन्तर गोवंश की चिकित्सा व्यवस्था हेतु तत्पर है तथा साथ ही स्थानीय प्रासन द्वारा भी गोआश्रय स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिये जा रहे है ।

 

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