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वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई के जन्म की पूर्व संध्या पर मनाया दीपोत्सव रिपोर्ट दया शंकर साहू नरेंद्र सविता

वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई के जन्म की पूर्व संध्या पर मनाया दीपोत्सव रिपोर्ट दया शंकर साहू नरेंद्र सविता

 

ग्रामीण एडिटर कृष्ण कुमार

 

झासी ग्रामो में मनाया जा रहा दीपोत्सव

जिसमे महारानी लक्ष्मी बाई के जन्म की पूर्व संध्या पर ग्राम फतेहपुर स्टेट में युबाओ द्वारा 151 दीपो की श्रंखला बना कर वीरांगना का स्वागत किया जिसमें राजेश सिंह सेंगर मंडल अध्यक्ष भाजपा पूँछ के नेत्रत्व में हुए दीपोत्सव कार्यक्रर्म में अपने विचारों में महारानी लक्ष्मीबाई के वीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब एक एक कर सभी राजा अग्रेजो के समर्थन में आते जा रहे थे वही महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से डट कर मुकाबला किया। महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नबम्बर 1835 में हुआ था बचपन मे इनका नाम मणिकर्णिका था सभी इन्हें प्यार से मनु पुकारते थे। 4 वर्ष की आयु में ही उनकी माता की मृत्यु हो गई थी। इनका बचपन

बरछी भाला तलवारों में ही गुजरा युद्ध मे अच्छे अच्छे योद्धाओं को धूल चटाने वाली मनु का विवाह झाँसी के महाराज गंगाधर राव से हुआ इनकी म्रत्यु के बाद झाँसी की राज गद्दी सम्भाला तव तक अंग्रेज अपनी जड़ें मजबूत करते हुए झाँसी आ पहुंचे और झाँसी में राज करने की नीयत से केई प्रस्ताव महारानी

के पास भेजे लेकिन जब कोई प्रयास सफल नही हुआ तो अंग्रेजो ने झाँसी पर आक्रमण कर दिया महारानी लक्ष्मीबाई

ने अंग्रेजो के आक्रमण का मुंह तोड़ जबाब ही नही दिया बल्कि देश मे आजादी के लिए पहला इंकलाब के साथ ही लड़ते हुए सहादत को प्राप्त किया। महारानी के इस प्रयास ने देश मे आजादी की अलख को जगाया देखते ही देखते देश के कोने कोने में इंकलाब के नारे लगने लगे सभी जाति एवं धर्म के लोग स्वाधीनता पाने के लिए अपने प्राणों की परवाह किये विना आगे आने लगे। महारानी की सहादत के बाद महज 90 वर्षो में ही अग्रेजो को भारत छोड़ कर जाने को मजबूर कर दिया। दीपोत्सव के दौरान दीपक सिंह परिहार मानवेंद्र सिंह परिहार, प्रिंस प्रताप सिंह, सिद्धार्थ सिंह परिहार, योगेन्द्र सिंह परिहार, रूद्र प्रताप सिंह, दिव्यांश परिहार, राज परिहार, प्रशांत परिहार, अक्षय प्रताप सिंह, आदि मौजूद रहे।

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