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जितना हम विकास कर रहे हैं क्या उससे कहीं ज्यादा हम विनाश की और बड़ रहे है:रिपोर्ट-मुबीन खान

गरौठा झांसी

जितना हम विकास कर रहे हैं क्या उससे कहीं ज्यादा हम विनाश की और बड़ रहे हे

ग्रामीण एडिटर धीरेन्द्र रायकवार

विकास के साथ हमने जिस चीज का सबसे ज्यादा विनाश किया वो है हमारा पर्यावरण | पर्यावरण हमारे जीने का आधार है , इसकी उपेक्षा कर के हमने पृथ्वी पर जीवन को ही खतरे में डालने की शुरुआत कर दी है | आज अनेकों बीमारियाँ इसका परिणाम है | अगर अब भी नहीं चेते तो शायद चेतने का मौका भी न मिले | एक अमेरिकी कहावत है कि ये पृथ्वी हमें अपने बुजुर्गों से विरासत में नहीं मिली है बल्कि इसे हमने अपने बच्चों से उधार में लिया है पर्यावरण की रक्षा करना हम सब का कर्तव्य है हम सब को अपने स्तर पर प्रयास करनी होगा
आइये पेड़ लगाए ,
अपने आस –पास के सूखते पेड़ों को पानी दें ,
पालीथीन का प्रयोग बंद करें ,बाहर जाते समय कपडे का थैला ले कर जाएँ ,
घर की मुंडेर पर चिड़िया के लिए चावल के कुछ दाने और पानी रखे जिससे पक्षियों की जान बचाई जा सके
और जिंतना हो सके आस –पास जाने के लिए वाहन का प्रयोग करने से बचे |
जितना जरूरत हो उतना ही खाना थाली में डाले … अन्न की बर्बादी सिर्फ अन्न की बर्बादी नहीं उसके साथ तेल , पानी और उर्जा भी बर्बाद होती है |
जिस कमरे से बाहर निकले उसकी लाईट , ए सी बंद कर दे … याद रखिये पैसा आप का हो सकता है पर संसाधन समाज के हैं मैंने अपने हिस्से की गलती को सुधारने की शुरुआत कर दी है और आपने क्या सोचा

गरोठा से मुबीन खान

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