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तुम खिलाओ सट्टा, नही होने देंगे कोई रट्टा, तुम करों वादा, वाद में मिलकर वांट लेंगे आधा-आधा:रिपोर्ट-धीरेन्द्र रायकवार

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  • ग्रामीण एडिटर ब्यूरो धीरेन्द्र रायकवार

मोंठ/झांसी नगर में इन दिनों IPL का सट्टा धड़ल्ले से प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम धड़ल्ले से खिलाया जा रहा है। जिसमें नगर के लोग भारी मात्रा में IPL का सट्टा खेल रहे हैं। जिसमें आप यह समझ लीजिए की IPL में सट्टा लगाने वाले लोग जो जीतते हैं वह दिवाली की खुशियां मनाते हैं, जो हार जाते हैं वह ताजिया की तरह मातम मनाते हैं, कुछ ऐसे ही हालात हमारे झांसी जिले के मोंठ क्षेत्र का है। जहां खुलेआम धड़ल्ले से IPL का सट्टा खिलाया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ऐरे गैरे लोगों को उठाकर सट्टटा पकड़ने की बात करतेे है। सट्टे की कार्रवाई की बात करती है।जिससे वह घबराकर पुलिस के सिस्टम में आ जाता है। कहीं न कहीं पुलिस से समझौता करने के लिए सामदाम दंड भेद तीनों का उसे उपयोग करना पड़ता है। संबंधित अधिकारी एक मोटी रकम वसूलकर उसे चलता कर देते हैं। आपको बता दें कहीं न कहीं यह पूरे सट्टे का खेल प्रशासन के संरक्षण में ही धड़ल्ले से दौड़ रहा है। जिसमें पर्चून विक्रेता, गेहूं विक्रेता, कपड़ा विक्रेता आदि लोगों द्वारा धड़ल्ले से सट्टा खिलाया जा रहा है। लेकिन आपको बता दें प्रशासन चुप्पी साधे हुए क्योंकि यह समझ लीजिए सम्बन्धित अधिकारियों का एक अपना फंडा है कि तुम करो वाद, बाद में बांट लेंगे मिलकर आधा-आधा, ऐसे ही हमारे मोंठ नगर की जनता का कहना है। सभी को पता है कि कहां और कैसे धड़ल्ले से खुलेआम सट्टा खिलाया जा रहा है। वहीं इस पूरे मामले पर एक चौंकाने वाला मामला भी सामने आया है। जिसमें काफी छानबीन करने के बाद पता चला कि आखिर सट्टा कैसे और कहां खिलाया जाता है। जब इसके बारे में हम आपको बताएंगे तो आपके पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी। अब आप कहें कैसे तो बता दें कि फोर व्हीलर कार में मोबाइल फोन, लैपटॉप, एक डायरी और एक कलम से लगातार हाईवे पर गाड़ी दौड़ती रहती है, और गाड़ी के साथ-साथ सट्टे का व्यापार भी धड़ल्ले से दौड़ता रहता है। अब देखना यह होगा कि झांसी जिले के पुलिस के मुखिया विनोद कुमार सिंह हो रहे धड़ल्ले से हो रहें  अवैध सट्टे के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई करेंगे। क्या कोई स्पेशल टीम गठित करके सट्टा व्यापारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई कराएंगे या फिर यूं ही धड़ल्ले से सट्टा का कारोबार चलता रहेगा। प्रशासन हाथ पर हाथ धरे यह तमाशा कुछ प्रतिशत हिस्सा लेने के चक्कर में देखता रहेगा। अभी सट्टा धारियों का यह मामला यही शांत नहीं हुआ था। सट्टा खेलने वाले लोग सट्टे के आदी हो जाते हैं। उसके बाद सट्टा में जब वह हार जाते हैं, तो कहीं न कहीं सूदखोरों से रुपए ब्याज पर लेकर सट्टा खेलते हैं। कभी-कभी ब्याज पर लिए हुए रुपए भी वह हार जाते हैं। उसके बाद शुरू होता है मां बहिन पत्नी के गहने बेचने का क्रम व सूदखोरों द्वारा दबाव बनाकर घर की इज्जत मां बहिन पत्नी के गहने बेचने का दबाव बनाया जाता है। कई बार जब गहने बेचने के बावजूद भी सूदखोरों की रकम की वसूली पूर्ण नहीं होती तो वह आखिर में मां बहिन बेटी की इज्जत बेचने को मजबूर कर देते हैं। इंसानियत को शर्मसार करने वाली वाली यह बात सिर्फ कुछ अधिकारी महज चंद रुपयों के लिए यह सट्टे का कारोबार धड़ल्ले से करा रहे हैं। जनता को है इंतजार, क्या अपराध का होगा खात्मा, क्या अपराध का होगा एनकाउंटर। 

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