आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की पहले 100 दिनों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रेस वार्ता कार्यक्रम का आयोजन प्रभारी सहायक निदेशक, डॉ. सी. वेंकट नरसिम्हाजी के मार्गदर्शन में किया गया
झांसी : केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, झांसी, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद्, द्वारा संचालित NABL, DTL, GMP and FSSAI प्रमाणित अनुसंधान केन्द्र है।
आज दिनाँक 07.10.2024 को संस्थान द्वारा आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की पहले 100 दिनों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रेस वार्ता कार्यक्रम का आयोजन प्रभारी सहायक निदेशक, डॉ. सी. वेंकट नरसिम्हाजी के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें संस्थान के प्रभारी सहायक निदेशक, डॉ. सी. वेंकट नरसिम्हाजी ने संस्थान की एवं आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की पहले 100 दिनों में किए गए कार्यों/ उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। सर्वप्रथम उन्होने बताया कि यह संस्थान केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद के अधीन आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्थान है। यह संस्थान आयुर्वेद अनुसंधान के लिए पूर्ण सेवा भाव से समर्पित है तथा आयुर्वेद अनुसंधान के समन्वय, विकास एवं संवर्धन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। संस्थान क्लिनिकल ट्रायल सुरक्षा, एवं प्रभावकारिता अध्ययन के लिए आयुर्वेदीय अनुसंधानात्मक दवाइयां को तैयार करता है एवं इसके साथ दवाइयो के मानकीकरण, विकास का कार्य, विभिन्न प्रकार की आवश्यक आयुर्वेदीय पौधों के कल्टीवेशन का कार्य एवं निरंतर विभिन्न प्रकार की अनुसंधान परक गतिविधियों के माध्यम से कार्यरत रहता है।
100 दिनों में आयुष मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियां : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ दाता समझौता, औषधीय पौधों पर वियतनाम के साथ समझौता ज्ञापन, आयुर्वेद पर मलेशिया के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन, “एक जड़ी-बूटी, एक मानक” पहल को बढ़ावा देना, आयुष औषधियों के लिए विशेष मेडिकल स्टोर को प्रत्येक तहसील में खोलना, 1489 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) का एनएबीएच मूल्यांकन पूरा हुआ, स्वस्थ भारत के लिए “हर घर आयुर्योग” पहल शुरू की गई, वृद्धजनों के लिए आयुष शिविर किया गया, आयुष उत्कृष्टता केंद्र, आयुष पैकेज को एबी-पीएमजेएवाई में शामिल करना, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली का दूसरे चरण एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला, हरियाणा का विकास, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के लिए तीन केंद्रीय अनुसंधान संस्थान स्थापित करने की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, स्वच्छता अभियान, स्वच्छता में जन भागीदारी, सफाई मित्र सुरक्षा शिविर ।
100 दिनों में संस्थान की प्रमुख उपलब्धियां हमारा संस्थान आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और सुरक्षा के साक्ष्य उत्पन्न करने के लिए वनस्पति विज्ञान, फार्मेसी, रसायन विज्ञान, फार्माकोग्रॉसी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे सभी वर्गों में 41 अनुसंधान परियोजनाएं चला रहा है। संस्थान द्वारा WHO- जीएमपी फार्मेसी के लिए रोडमैप तैयार करने हेतु ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन दिनोंक 29.06.2024 भी किया गया। इस विचार-मंथन सत्र में मंत्रिस्तरीय और नियामक विशेषज्ञ के साथ सीसीआरएएस के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के कुल 25 प्रतिभागियों ने फार्मेसी के डब्ल्यूएचओ-जीएमपी रोडमैप पर चर्चा करने के लिए भाग लिया। महत्वपूर्ण और उपयोगी आयुर्वेदिक औषधीय पौधों के संरक्षण और फार्मेसी की मांग को पूरा करने के लिए संस्थान ने दशमूल पौधों का वृक्षारोपण किया है, और भविष्य में भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। संस्थान मॉरीशस के 10 औषधीय पौधों के मानकीकरण एवं मोनोग्राफ विकास पर भी कार्य कर रहा है। संस्थान इस केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में क्रियान्वित करने की योजना बना रहा है। आयुर्ज्ञान योजना के तहत, संस्थान आयुष व्यवसायिकों के लिए सीएमई और विभिन्न प्रशिक्षणों के आयोजन के माध्यम से आयुष स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने और विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में उद्योगों की शुरूआत के लिए परामर्शी सेवाओं हेतु इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। चूंकि संस्थान ने स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं, इसलिए स्वर्ण जयंती समारोह के तहत आयुष मंत्रालय और सीसीआरएस के निर्देशन में संस्थान द्वारा दिनांक 21 और 22 नवंबर 2024 को आयुर्वेदिक औषधि विकास पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।
आयुष मंत्रालय के “भारत का प्रकृति परीक्षण” अभियान के तहत संस्थान द्वारा 120 प्रतिभागियों का प्रकृति परीक्षण का कार्य किया जा रहा है। संस्थान द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन जैसे पोषण जागरुकता व्याख्यान, वेबिनार का आयोजन किया गया। संस्थान द्वारा राजभाषा हिन्दी पखवाड़ा एवं “स्वच्छता ही सेवा” पखवाड़ा का आयोजन किया गया। संस्थान द्वारा आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी, एनबीआरआई, लखनऊ एवं राष्ट्रीय महत्व के आठ संस्थानों के साथ सहयोगात्मक परियोजना का संचालन किया जा रहा है । संस्थान द्वारा बुजुर्ग नागरिकों के लिए झांसी जनपद के आयुष आरोग्य मंदिर, भटपुरा में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
इस दौरान प्रो. (डॉ.) रामकृष्ण राठौर, प्राचार्य, बुन्देलखण्ड राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय झाँसी, डॉ जगजीवन राम, जिला आयुर्वेद अधिकारी, प्रो. (डॉ.) गोविंद प्रसाद मंगल, डॉ. पुनीत मिश्रा, डॉ मदन मोहन झा, डॉ. संजीव कुमार लाले, अनु.अधि. (आयु.), डॉ. चन्द्रशेखर जगताप, डॉ. वैभव चरडे, आदि मौजूद रहें। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. नीलम सिंह द्वारा किया गया।
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