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(आत्म चिंतन ) “मृत्यु भोज परिवार तक सीमित कर, सृजनात्मक कार्य में करें सहभागिता”,दिलीप कुमार चौरसिया

(आत्म चिंतन )
“मृत्यु भोज परिवार तक सीमित कर, सृजनात्मक कार्य में करें सहभागिता”दिलीप कुमार चौरसिया
आम जनमानस को आवाहन कर रहा हूं कि आज की आधुनिक भाग दौड़ व व्यस्ततम जीवन में आर्थिक नोकझोंक व पारिवारिक कलह एवं अशांत मन के बीच अचानक ” परिवार में आकस्मिक निधन हो जाता है परिवार पर आकस्मिक अकाल सा टूट पढ़ता पड़ता है, परिवार का मुखिया शांत और धैर्य का परिचय देते हुए कठोर मनसे इस कष्ट को आत्मसात कर परिवार के शोक संतृप्त व्यक्तियों को हृदय से लगाकर उक्त संकट को सहन करने के लिए साहस प्रदान करता है
हम आप सभी लोग जानते हैं कि इस भागदौड़ भरे जीवन में आर्थिक स्थिति समय अनुसार अपना स्थान बदलती रहती है और कभी परिवार में लाखों रुपए होता है और कभी-कभी ₹1000 भी अचानक घर में ढूंढने पर नहीं मिलते इन परिस्थितियों के बीच यदि अचानक निधन की सूचना प्राप्त होती है तो बहुत से गरीब परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर होने के कारण अचानक गांव व शहरों में अक्सर देखने को मिलता है कि साहूकार व कर्ज देने वाले ऐसी विपरीत परिस्थितियों का भरपूर लाभ उठाते हुए उल्टे सीधे ब्याज पर पैसा देकर सहयोग की भावना दिखाते हुए आपकी पीठ पर वार करने का काम करते हैं। इस आर्थिक सहयोग या कर्ज से परिवार का मुखिया मुक्तिधाम पर मुखाग्नि देने के उपरांत समाज की अनेकों परंपराएं के नाम पर वर्तमान में कुरीति के रूप में खूब फल-फूल रहा है,सामुहिक मृत्यु भोज।
समाज के कुछ ठेकेदारों के द्वारा शोक संतृप्त परिवार को परंपराओं की दुआ देते हुए सामुहिक मृत्यु भोज कराने की सलाह देते हुए परस्पर सौहार्द पूर्ण मिलन की परंपरा बताकर मार्गदर्शन प्रशस्त किया जाता हैं ऐसे समाज के ठेकेदारों से सावधान रहते हुए *मृत्यु भोज को पूर्णता बंद /परिवार तक सीमित कर सृजनात्मक कार्य करें।जैसे- शिक्षा, चिकित्सा और गरीब कन्याओं के विवाह में योगदान करें।
..सौहार्दपूर्ण भोज के लिए अनेकों अवसर आपके पास है आगामी एक वर्ष उपरांत प्रथम पुण्यतिथि पर पूर्व नियोजित तरीके से आर्थिक मैनेजमेंट कर अपने परिवार के गमगीन माहौल को खुशहाल बनाने के लिए पुण्यतिथि के शुभ अवसर पर नगर के प्रतिभाशाली बच्चों का सम्मान करते हुए अपनी क्षमता अनुसार सादगी पूर्ण भोजन कराते हुए अपने पूर्वजों को तृप्त करने की कृपा करें प्रत्येक पुण्यतिथि पर समाज सेवा के क्षेत्र में अनेकों सार्वजनिक क्षेत्र ऐसे हैं या मलिन बस्तियां हैं जहां पीने का पानी तक लोगों को उपलब्ध नहीं है ऐसी बस्तियों में सार्वजनिक स्थानों पर पानी के टैंक बनाकर “इन विल्ड वाटर आरो कूलर” लगाकर आम जनमानस को स्वच्छ पेयजल प्रदान कर समाज को महत्वपूर्ण सहयोगी बनने का प्रयास करें ।
मैं स्वयं मृत्यु भोज परिवार तक सीमित करने के लिए कृत संकल्पित हूंँ सामूहिक मृत्यु भोज बन्द होना चाहिए। यदि आप मेरे आत्म चिंतन व प्रयास से सहमत हो तो समर्थन करें
आपका

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