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सैकड़ों वर्ष पुराना प्राचीन वांके विहारी जी का मन्दिर श्रद्धालुओं की आस्था का बना केन्द्र

सैकड़ों वर्ष पुराना प्राचीन वांके विहारी जी का मन्दिर श्रद्धालुओं की आस्था का बना केन्द्र

जालौन-कोंच इस मंदिर में सांवले वांके विहारी जी विराजमान है। वहीं वांके विहारी मंदिर के सामने ही काले हनुमान जी भी है, इनका मुख सिंदूरी है लेकिन वांकी शरीर काला है। श्रद्धालुओं के मुताबिक यहाँ के अलावा आपको कहीं भी इस तरह के हनुमान जी देखने को नहीं मिलेंगे। इस वांके विहारी मंदिर की महिमा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक दीदी पुष्पांजलि बताती हैं कि वह इस मन्दिर में आती रहतीं हैं। इस मंदिर में आकर दर्शन करने से बहुत ही अच्छी अनुभूति होती है। दीदी पुष्पांजलि ने बताया कि यहां के वांके विहारी जी को आप लोग यही समझ लें कि मन्दिर में घर है या घर में मन्दिर है। उंन्होने कहा कि मंदिर में कई श्रद्धालु आते हैं और रुक भी जाते हैं चूंकि मंदिर छोटा होने के कारण लोग अगर मंदिर के किनारों पर सो जाएं तो ठीक है लेकिन अगर परिक्रमा मार्ग में सो गए तो यहां पर वांके विहारी रात में निकलते है तो वह अपना पैर रखकर निकल जाते है, जिसकी पीड़ा भी व्यक्ति को भोगनी पड़ती है लेकिन कुछ समय बाद सब ठीक हो जाता है। फिलहाल सैकड़ों वर्ष पुराना मन्दिर आज कोंच में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, लोग जो यहां मानते हैं उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। फिलहाल मन्दिर काफी पुराना है मन्दिर के जीर्णोद्वार के लिए पुरातत्व विभाग को आगे आना होगा और प्राचीन मंदिर के सौंदर्यकरण का काम कराना होगा।

रविकांत द्विवेदी, जालौन-यूपी

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