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*भक्ति में साधक को योगी, जिज्ञासु, भक्त होना बहुत अनिवार्य है-दीदी पुष्पांजलि*

*भक्ति में साधक को योगी, जिज्ञासु, भक्त होना बहुत अनिवार्य है-दीदी पुष्पांजलि*

भक्ति में साधक को योगी, जिज्ञासु, भक्त होना अनिवार्य है। यह बात गल्ला मंडी कोंच में मानस पुत्री दीदी पुष्पांजलि ने कही। कोंच में गल्ला मंडी में दीदी पुष्पांजलि ने कहा कि जिस साधक को कर्म योग पर चलना है, उसको पहले यह मान लेना चाहिए कि मैं योगी हूं। जिसको ज्ञान योग के मार्ग पर चलना हो उसको पहले यह धारणा करनी चाहिए कि मैं जिज्ञासु हूँ। जिसको भक्ति योग के मार्ग पर चलना हो उसको पहले यह मान लेना चाहिए कि मैं भक्त हूँ। दीदी पुष्पांजलि ने कहा कि उनका तात्पर्य यह है कि साधक को योगी होकर या जिज्ञासु होकर अथवा भक्त होकर साधना करना चाहिए। जो योगी होकर साधन भक्ति करता है उसको जब तक योग समता की प्राप्ति न हो तब तक संतोष नहीं करना चाहिए। योग नाम समता का है। अंत में दीदी पुष्पांजलि ने कहा कि राग-द्वेष, हर्ष-शोक आदि द्वन्द्ध योगी बनने में बाधक है। अतः साधक का उद्देश्य राग द्वेष मिटाने का होना चाहिए। इस मौके पर गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय रावत, अशोक कुमार गुप्ता लोई वाले ,श्याम सुंदर लल्ला, राजकुमार मंत्री, चुन्ना धनौरा, विजय गुप्ता ,प्रेम नारायण राठौर , दिनेश ,श्याम जी शर्मा, हरीश तिवारी एवं गल्ला व्यापारियों के अलावा बजरंग दल के जिला सह संयोजक आकाश उदैनिया, बजरंग दल के जिला सुरक्षा प्रमुख गौरव सोनी,प्रथम द्विवेदी, दर्श आदि मौजूद रहे।

रविकांत द्विवेदी, जालौन-यूपी

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