विगत दिनों हुई बारिश से किसानों की धान की रोपाई का कार्य हुआ शुरू, बिहार से आये मजदूरों को मिला रोजगार। रिपोर्ट-इदरीश बाबा
किसानों ने की धान की रोपाई चालू। धान की रोपाई के समय किसानों को कई समस्याओं का करना पड़ता है सामना ।इन समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या पानी की होती है ।जो कुछ हद तक ही इंद्र देवता ने इस पानी की समस्याओं को दूर किया है। बकाया ट्यूबवेल के जरिए से किसान अपने खेतों में पानी भरते हैं ।ट्रैक्टर द्वारा उस में मचाई करते हैं ।इसके बाद पहले से ही धान की नर्सरी तैयार कर लेते है। जो लगभग 20 दिन पहले से धान की नर्सरी की तैयारी की जाती है। इस नर्सरी को किसान निकाल कर खेतों में प्रत्यारोपित करवाते हैं ।यह फसल लगभग 125 दिन की होती है। इसमें कई बार दवाइयों का प्रयोग भी किसान करते हैं ।जब यह फसल पक कर तैयार होती है ।फिलहाल इस फसल के लिए किसानों को नहर के पानी की भी जरूरत होती है। और इस फसल की लागत में लगभग प्रति बीघा 3000 रुपये तक का खर्चा आ जाता है। जहां मोठ तहसील के कई गांव में लगभग 80% फीसदी किसान 1121 वैरायटी की धान और वहीं 20% किसान 1509 वैरायटी की धान करते हैं ।इन वैरायटीओं में अधिक कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करना पड़ता है। वही लगभग झमाझम बारिश के कारण जो किसान धान की नर्सरी तैयार किए हुए थे ।उनकी धान की रोपाई का कार्य लगभग शुभारंभ हो गया है ।वही बिहार प्रदेश से आए मजदूरों के द्वारा बताया गया है। कि वह एक ग्यारह बीघा में 1100 सौ रुपये की मजदूरी मिलती हैं।